इन योगों के कारण वैवाहिक जीवन में परेशानियां रहती हैं

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पति-पत्नी की आपसी समझ से ही वैवाहिक जीवन सुखी और समृद्धिशाली बन सकता है। दोनों में से किसी एक की वजह से भी तालमेल बिगड़ता है तो परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। कुछ परिस्थितियों में शादी तलाक तक भी पहुंच जाती है। यहां जानिए कुंडली के कुछ ऐसे योग जो वैवाहिक जीवन में परेशानियों की ओर इशारा करते हैं। यदि कुंडली में ये योग होते हैं तो व्यक्ति को जीवन साथी के संबंध में विशेष सावधानी रखनी चाहिए।

  1. कुंडली के लग्न भाव में शनि और राहू स्थित हो तो वैवाहिक जीवन सुखी नहीं रहता है।
  2. सप्तम भाव का स्वामी षष्ठम भाव, अष्टम या द्वादश भाव में हो तो वैवाहिक सुख में कमी होना संभव है।
  3. .षष्ठम भाव न्यायालय का भाव भी है। सप्तम भाव का स्वामी (सप्तमेश), षष्ठम भाव के स्वामी (षष्ठेश) के साथ छठे भाव में हो या षष्ठेश, सप्तमेश या शुक्र की युति हो तो पति-पत्नी को कानून से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
  4. कुंडली के सप्तम भाव में राहु के साथ बारहवें भाव का स्वामी स्थित हो तो वैवाहिक सुख में कमी रहती है। बारहवें भाव में सप्तम भाव का स्वामी और सप्तम भाव में द्वादश भाव का स्वामी हो और उसके साथ राहु हो तो दांपत्य सुख में कमी रहती है।
  5. षष्ठम भाव के स्वामी का संबंध यदि द्वितीय, सप्तम, द्वितीय भाव के स्वामी, सप्तम भाव के स्वामी या शुक्र से हो तो शादीशुदा जीवन सुखी नहीं रह पाता है।

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