ताजमहल के हिन्दू इमारत होने का जीता जागता सबूत प्रो- मर्विन मिल्स

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इतिहास की किताबों को आज़ादी के बाद फर्जी इतिहासकारों ने लिखी है, रोमिला थापर, रामचंद्र गुहा, इरफ़ान हबीब जैसे फर्जी इतिहासकारों की लिखी किताबें आज भी स्कुल कॉलेज में पढाई जाती है 

फर्जी इतिहासकार इरफ़ान हबीब ने तो हाल ही में बीजेपी पर हमला करते हुए अपने फर्जी ज्ञान से कहा की – बीजेपी अगर नामो को बदल ही रही है तो अमित शाह का नाम बदले, क्यूंकि शाह एक पर्शियन शब्द है, इस फर्जी इतिहासकार को इतिहास की कोई जानकारी ही नहीं है

असल में शाह संस्कृत के साधू और प्राकृत के साहू शब्द से बना है, शाह भारतीय शब्द है जो की व्यापारी वर्ग से जुड़ता है, खैर – फर्जी इतिहासकारों ने ताजमहल को शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया ईमारत घोषित किया हुआ है, जबकि इस बात का फर्जी इतिहासकारों के पास कोई सबूत नहीं है

हमने पहले भी बताया था की मुमताज़ महल की मौत मध्य प्रदेश में हुई थी, और उसे उसी के महल में दफनाया गया था, बाद में उसकी कब्र को आगरा लागाकर यहाँ दफना दिया गया, पर मुमताज़ जब जिन्दा थी तो उसके मध्य प्रदेश स्थित महल के कमरों में ताजमहल की नक्काशियां की गयी थी (एक तरह की पेंटिंग)

ताजमहल मुमताज़ और शाहजहाँ के जन्म से भी पहले से आगरा में था, वैसे आगरा का असली नाम अग्रवन है, ताजमहल के तैखाने आज भी बंद है, प्रोफेसर PN ओक ने नेहरु को रिपोर्ट सौंपी थी की ताजमहल एक हिन्दू ईमारत है, और इसके तैखाने खोलकर देख लिए जाए दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा, तब नेहरु ने कहा था ऐसा नहीं कर सकते, और ताजमहल के तैखाने हमेशा से बंद ही है

असल में ताजमहल तेजो महालय नाम का शिव मंदिर है, इस्लामिक आतंकवादियों ने इस मंदिर में लगी मूर्तियों को तोड़ दिए, कई मूर्तियाँ आज भी तैखाने के अन्दर पड़ी हुई है, मंदिर को तोड़कर ऊपर गुम्बद बना दिए, और अरबी और अन्य विदेशी भाषा में इसपर इस्लामिक टेक्स्ट लिखवा दिए, और इसे कब्रिस्तान बना दिया

किसी भी अच्छे आर्किटेक्ट को आप ताजमहल का विश्लेषण करने भेजेंगे तो वो जल्द ही आपको बता देगा की ये ईमारत असल में एक हिन्दू ईमारत है, इस्लामिक आतंकवादियों ने इसमें कई बदलाव किये पर वो सभी हिन्दुओ निशानियों को नहीं मिटा पाए, आज भी ताजमहल में कलश, कमल, और ॐ तक के निशान है

अमरीका के मशहूर आर्किटेक्ट प्रोफेसर मर्विन मिल्स ने भी ताजमहल का विश्लेषण किया, और उन्होंने भी इसे हिन्दू ईमारत करार दिया, इतना ही नहीं उन्होंने कहा की ये ईमारत तो 13वी सदी में बनाई गयी थी, जबकि शाहजहाँ तो छोडिये उस समय बाबर भी भारत में नहीं था

प्रोफेसर मर्विन मिल्स को की अमेरिका के मशहूर प्रात्त इंस्टिट्यूट में पढ़ाने वाले आर्किटेक्ट है उन्होंने ताजमहल की स्टडी की और उनकी रिपोर्ट न्यू यॉर्क टाइम्स में भी प्रकशित की गयी, उन्होंने ताजमहल को हिन्दू ईमारत बताया और साथ ही कहा की इसपर इस्लामिक लोगों ने कब्ज़ा करके इसे मकबरे (कब्रिस्तान) की शक्ल दे दी

इस दुनिया में कार्बन डेटिंग नाम की एक चीज होती है, जिस से आप पत्थरों, धातु इत्यादि की सही उम्र का अंदाजा लगा सकते है, कार्बन डेटिंग से भी पता चलता है की ताजमहल में जो पत्थर लगे है वो 13वी सदी के है

प्रोफेसर मिल्स ने ये भी कहा की ताजमहल को देखते ही कोई भी जानकर बता सकता है की ये इस्लामिक ईमारत नहीं है, मस्जिद तो मक्का की साइड करके बनती है, पर ताजमहल में नमाज़ के लिए बनी मस्जिद मक्का की साइड करके नहीं बनी, ताजमहल के उत्तर में 20 से ज्यादा कमरे बने है तैखाने में जो यमुना नदी के तरफ है, ऐसा किसी मकबरे में क्यों होगा, मकबरे में पानी नहीं आता, कब्रों को पानी से गीला थोड़ी करना है, हां शिव मंदिर में पानी लाया जाता है अभिषेक के लिए

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