भारत के कुछ रहस्यमयी स्थान जो बिलकुल अनोखे हैं जरूर पढ़ें

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भारत की गिनती विश्व में सबसे रहस्यमय देशों में से एक में की जाती है। प्राचीन काल में यह ज्ञान-विज्ञान का महत्वपूर्ण केंद्र था। इसके अलावा, दुनियाभर के लोग भारत में तंत्र-मंत्र को देखने व जानने के लिए खींचे चले आते थे। यह सिलसिला आज तक बरकरार है। हालांकि, समय के साथ-साथ दुनिया का नजरिया भारत के प्रति बदला है औऱ वे अब इसे तंत्र-मंत्र का देश नहीं, बल्कि तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था में से एक मानने लगे हैं।

जोधपुर के आकाश में गूंजी रहस्यमय आवाज

18 दिसंबर, 2012 को जोधपुर के आकाश में ऐसी ही एक अनोखी घटना घटी। इस घटना में, जोधपुर के आकाश में सोनिक बूम की तरह एयरप्लेन क्रैश करने की आवाज सुनाई पड़ी। हालांकि, यह एक प्राकृतिक घटना थी और इसका आवाज ऐसे लग रहा था, जैसे कि कोई भयानक विस्फोट हुआ हो। वहां के नागरिक इस आवाज से काफी चिंतित हो गए थे और अपने अगल-बगल के लोगों से चर्चा कर रहे थे। हालांकि, यह बात स्पष्ट हो गई कि जोधपुर के आकाश में कोई प्लेन उड़ नहीं रहा था और न ही कोई विस्फोट हुआ था। जोधपुर बूम का स्रोत अभी तक लोगों को पता नहीं चल सका है। इस तरह की घटना यूनाइटेड किंगडम से लेकर टेक्सास तक पूरे विश्व में हुई थी।

ताजमहल

यह ऐतिहासिक वास्तु स्थापत्य और अपनी खूबसूरती के लिए संपूर्ण दुनिया में जाना जाता है। यह विश्व के सात अजूबों में से एक है। ताजमहल का निर्माण उजले मार्बल से हुआ है। इसका निर्माण मुगल शासक शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज बेगम की याद में कराया था।

हिमालय

हिमालय के नजदीक लद्दाख में एक बहुत ही आश्चर्यचकित करने वाला पहाड़ी है। इसके बारे में कहा जाता है कि यह चुंबकीय गुणों से युक्त है। अगर आप अपनी कार को सड़क किनारे पार्क करते हैं तो यह पहाड़ी की चोटी पर पहुंचकर न्यूट्रल हो जाता है। यह 20 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से नीचे की ओर अपने आप चलता चला जाता है। गाइड के अनुसार यह एक सुपरनेचुरल घटना है और इसे स्थानीय लोग हिमालयन वंडर कहते हैं।

शांति देवी

शांति देवी का जन्म 1930 में एक खुशहाल परिवार में दिल्ली में हुआ था। हालांकि, वह ज्यादा समय तक खुश नहीं रह सकी। जब वह चार साल की थी तब से जिद्द करने लगी कि उसके माता-पिता कोई और हैं। उसने दावा किया कि एक बच्चे को जन्म देते समय उसकी मृत्यु हो गई थी और अपने पति तथा परिवारजनों के बारे में काफी जानकारियां दी थी। शांति देवी के पिता ने उसके दावों के बारे में जब पता किया तो वे सारे वे सच निकले। एक युवा महिला जिसका नाम लुडगी देवी था की मौत बच्चे को जन्म देते समय हो गई थी। उन्हें और ज्यादा आश्चर्य तो तब हुआ जब उन्हें शांति देवी ने समय और शहर एकदम सटीक बताया था। जब वह अपने पूर्वजन्म के पति से मिली तो उसने उसे पहचान लिया और अपने बच्चे को उसकी मां की तरह प्यार करने लगी। इसके अलावा कई ऐसी बातें हुई जिसे सैकड़ों वैज्ञानिकों औऱ स्कॉलरों द्वारा कभी गलत साबित नहीं किया जा सका।

अजंता-एलोरा की गुफाएं

गुफाएं तो भारत में बहुत हैं, लेकिन अजंता-एलोरा की गुफाओं के बारे में वैज्ञानिक कहते हैं कि ये किसी एलियंस के समूह ने बनाई हैं। यहां पर एक विशालकाय कैलाश मंदिर है। आर्कियोलॉजिस्टों के अनुसार इसे कम से कम 4 हजार वर्ष पूर्व बनाया गया था। 40 लाख टन की चट्टानों से बनाए गए इस मंदिर को किस तकनीक से बनाया गया होगा? यह आज की आधुनिक इंजीनियरिंग के बस की भी बात नहीं है। माना जाता है कि एलोरा की गुफाओं के अंदर नीचे एक सीक्रेट शहर है। आर्कियोलॉजिकल और जियोलॉजिस्ट की रिसर्च से यह पता चला कि ये कोई सामान्य गुफाएं नहीं हैं। इन गुफाओं को कोई आम इंसान या आज की आधुनिक तकनीक नहीं बना सकती। यहां एक ऐसी सुरंग है, जो इसे अंडरग्राउंड शहर में ले जाती है।

हम्पी और किष्किंधा

दक्षिण भारत के कर्नाटक का छोटा-सा गांव है हम्पी। यूनेस्को की विश्व विरासत की लिस्ट में शामिल हम्पी भारत का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। हम्पी कर्नाटक राज्य का हिस्सा है। हम्पी बेलगांव से 190 किलोमीटर दूर, बेंगलुरु से 350 किलोमीटर दूर और गोवा से 312 किलोमीटर दूर है। मंदिरों का यह प्राचीन शहर मध्यकाल में हिन्दू राज्य विजयनगर साम्राज्य की राजधानी था।

हम्पी में बने दर्शनीय स्थलों में सम्मिलित हैं- विरुपाक्ष मंदिर, रघुनाथ मंदिर, नरसिम्हा मंदिर, सुग्रीव गुफा, विठाला मंदिर, कृष्ण मंदिर, हजारा राम मंदिर, कमल महल और महानवमी डिब्बा। हम्पी से 6 किलोमीटर दूर तुंगभद्रा बांध है।हमने हम्पी को इसलिए लिया, क्योंकि यह कभी राम के काल में किष्किंधा क्षेत्र में हुआ करता था। यह किष्किंधा का केंद्र था। आजकल होसपेट स्टेशन से ढाई मील दूरी पर और बेल्लारी से 60 मील उत्तर की ओर स्थित एक पहाड़ी स्थान को किष्किंधा कहा जाता है। रामायण के अनुसार यह वानरों की राजधानी थी। यहां ऋष्यमूक पर्वत के आसपास तुंगभद्रा नदी बहती है। ऋष्यमूक पर्वत तथा तुंगभद्रा के घेरे को चक्रतीर्थ कहते हैं। रामायणकाल में किष्किंधा वानर राज बाली का राज्य था। कर्नाटक के दो जिले कोप्पल और बेल्लारी को मिलाकर किष्किंधा राज्य बनता है।

किष्किंधा में घूमने के लिए कई स्थान हैं। ब्रह्माजी का बनाया हुआ पम्पा सरोवर है। हनुमानजी की जन्मस्थली आंजनाद्रि पर्वत है। बाली की गुफा और सुग्रीव का निवास स्थान ऋषम्यूक पर्वत भी यहीं स्थित है। चिंतामणि मंदिर, जहां से राम ने बाली के ऊपर तीर चलाया था, वो भी इसी जगह के अंतर्गत आता है। ये सब किष्किंधा के कोप्पल जिले वाले भाग में आते हैं। बेल्लारी जिले के अंतर्गत आने वाले किष्किंधा के दूसरे भाग में भगवान राम ने जहां चार्तुमास किया था, वो माल्यवंत पर्वत और हनुमान आदि वानरों ने सीता का पता लगाकर लौटते वक्त जिस वन में फल खाए थे, वो मधुवन यहां पड़ता है। इसके अलावा भी कई छोटे-बड़े मंदिर और शिवलिंग यहां स्थित हैं।

लद्दाख का द कोंग्का ला दर्रा

दुनिया के उन इलाकों में है, जिसके बारे में बहुत कम जानकारी मिल पाई है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण हिमालय क्षेत्र में होना है। यह भारत और चीन की सीमा पर पड़ता है। यह दोनों देशों के बीच सैन्य-विवाद का विषय बन चुका है। यह नो-मैन्स लैंड घोषित है। दोनों देश इस पर नजर रखते हैं, लेकिन कोई भी देश इस क्षेत्र में पेट्रॉलिंग नहीं करता है। स्थानीय निवासियों और यात्रियों का दावा है कि यूएफओ यानी उड़न तश्तरी का देखा जाना इस क्षेत्र में आम बात है। भारत और चीन दोनों ही देश को इस संबंध में जानकारी है और वे एक-दूसरे से सूचनाएं प्रदान करती है। यहां तक कि गूगल अर्थ ने भी इस तरह की घटनाओं का जिक्र किया है।

भारत के 9 रहस्मय लोग

भारत के 9 ऐसे लोग हैं जो पश्चिमी देशों के लिए आज तक एक रहस्य बने हुए हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस तरह के शक्तिशाली सोसाइटी की नींव सम्राट अशोक ने 273 ई.पू. में रखा था। इस सोसाइटी का निर्माण कलिंग के युद्ध में 1 लाख से अधिक लोगों की मौत के बाद हुआ था। इन सभी 9 लोगों के पास ऐसी सूचनाएं थीं, जो गलत हाथों में जाने पर खतरनाक हो सकती थी। इस किताब में प्रोपगंडा सहित माइक्रोबायोलॉजी से संबंधित किताबें थी। कुछ के बारे में कहा जाता है कि इसमें गुरुत्वाकर्षण और टाइम ट्रैवल के सिद्धांत के विपरीत गुप्त बातें दर्ज थीं। ये 9 लोग पूरे विश्व में फैले थे। सबसे आश्चर्य की बात है कि इनमें से सभी भारतीय नहीं थे। इन लोगों में से 10 वीं शताब्दी के पोप सिल्वेस्टर II और विक्रम साराभाई का नाम आता है। विक्रम साराभाई ने ही भारतीय स्पेस प्रोग्राम की नींव रखी थी।

कुलधारा

500 वर्षों से अधिक समय से कुलधारा में 1,500 परिवार रहा करते थे। एक रात वे सभी गायब हो गए। वे न तो मरे और न ही उनका अपहरण किया गया था, उन लोगों ने गांव छोड़ा था। इसके पीछे की क्या कारण थे, इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। लोग तमाम तरह के किस्से-कहानियां सुनाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार बाद में, कुछ लोगों ने इस गांव पर अपना अधिकार करने की चेष्टा की लेकिन वे सारे लोग मारे गए।

भूतबिल्ली औऱ घोस्ट कैट

एक रहस्यमयी मॉन्सटर है। इसके बारे मे भारत के कई हिस्सों विशेषकर पुणे के निवासियों के बीच कई तरह की कहानियां प्रचलित है। स्थानीय लोगों का मानना है कि एक अजीब तरह का जीव है जो कभी बिल्ली तो कभी कुत्ता तो कभी और नेवला का वेष बदल लेता है। एक प्रत्य़दर्शी के अनुसार यह काफी मोटा-चौड़ा औऱ लंबे पूंछ वाला जीव है। इसका रंग काला है तथा चेहरा कुत्ता की तरह और पीठ नेवला की तरह है। यह लंबा जंप करने में सक्षम है। अगर कोई पकड़ने की कोशिश करता है तो यह छलांग लगाकर पेड़ पर पहुंच जाता है।

सुंदरवन का जंगल

जंगल तो भारत में बहुत सारे हैं लेकिन सुंदरवन का जंगल अपने भीतर कई तरह के रहस्यों को समेटे हुए हैं। सबसे सुंदर और भयानक जंगल होने के कारण यहां भारत के कई ऋषि-मुनियों ने घोर तप किया है। इस जंगल में घूमने से जो सुकून, शांति, रहस्य और रोमांच का अनुभव होता है, वह किसी अन्य जंगल में नहीं। कहते हैं कि इन जंगलों में बड़ी तादाद में भूत निवास करते हैं। सुंदरवन राष्ट्रीय अभयारण्य पश्चिम बंगाल (भारत) में खानपान जिले में स्थित है। इसकी सीमा बांग्लादेश के अंदर तक है। सुंदरवन भारत के 14 बायोस्फीयर रिजर्व में से एक बाघ संरक्षित क्षेत्र है। इस उद्यान को भी विश्‍व धरोहर में शामिल किया गया है। कई दुर्लभ और प्रसिद्ध वनस्पतियों और बंगाल टाइगर सहित दुर्लभ प्राणियों के लिए प्रसिद्ध इस जंगल में पक्षियों की अनगिनत प्रजातियां निवास करती हैं।

तीर्थराज पुष्कर

राजस्थान का रेगिस्तान अपने आप में एक रहस्य है। राजस्थान के बीच में से ही सरस्वती नदी बहती थी और यहां पर ही दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता रहती थी। आज भी सरस्वती की सभ्यता खोजी जाना बाकी है। कहा जाता है कि सरस्वती नदी के तट पर ही बैठकर ऋषियों ने वेद और स्मृति ग्रंथ लिखे थे।

पुष्कर राजस्थान के लगभग बीचोबीच स्थित है। पुष्कर में ब्रह्माजी के एकमात्र मंदिर है। तीर्थ तो बहुत हैं लेकिन पुष्कर एक तीर्थस्थल है इसलिए इसका जिक्र नहीं किया जा रहा। पुष्कर उस प्राचीन सभ्यता का केंद्र है, जो कभी 4,000 वर्ष पूर्व अर्थात महाभारतकाल तक अस्तित्व में थी। भारत में झीलें बहुत हैं, जैसे महाराष्ट्र में लोणार की झील, जयपुर और उदयपुर की झीलें लेकिन पुष्कर में स्थित झील का महत्व कुछ और ही है। इस रहस्यमय झील और आसपास के क्षेत्र पर शोध किए जाने की आवश्यकता है। अजमेर से मात्र 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है तीर्थस्थल पुष्कर।

 

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