सेकुलरिज्म का इस्तेमाल केवल हिन्दुओ को दबाने, उनकी संस्कृति के खिलाफ किया जाता है : रजनीकांत

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सुपरस्टार कमल हासन के बाद मेगास्टार रजनीकांत ने भी भारत के सेक्युलर बुद्धिजीवी तत्वों को आज जोरदार लताड़ लगायी है बता दें की तमिलनाडु में एक खेल 5000 सालों से हो रहा है जिसका नाम जल्लीकट्टू है, इस खेल में जानवरो को मारा नहीं जाता, न ही उन्हें कोई चोट पहुंचाई जाती है जल्लीकट्टू तमिलनाडु में हिन्दुओ के त्यौहार पोंगल, जिसे उत्तर भारत में मकर संक्रांति कहा जाता है उस दिन खेला जाता है, ये हिन्दू परंपरा है

भारत के सेक्युलर बुद्धिजीवी तत्वों को तो आप भलीभांति जानते है, ये सब सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए, और सेक्युलर संविधान से ग्रसित सेक्युलर सुप्रीम कोर्ट ने जलीकट्टू पर तुरंत कारवाही करते हुए उसपर रोक लगा दी ये वही सुप्रीम कोर्ट है, जो बकरीद की याचिका पर अबतक सुनवाई नहीं कर सका है जिसमे करोडो जानवरो का तो क़त्ल होता है

भारतीय सेक्युलर तत्वों पर हमला बोलते हुए पिछले दिनों सुपरस्टार कमल हासन ने कहा था की, ये सेक्युलर तत्व जल्लीकट्टू के खिलाफ बोलते है, स्वयं को जानवर प्रेमी बताते है, ये जानवर प्रेमी है तो
मांस खाना क्यों नहीं छोड़ते, मांस युक्त बिरयानी तो ये खूब उड़ाते है, तब इन्हें जानवरो के प्रति करुणा नहीं आती

अब भारत के मेगास्टार रजनीकांत ने भी कमल हासन की तरह ही सेक्युलर तत्वों पर जोरदार हमला करते हुए, उन्हें दोगला और बेशर्म बता दिया है  रजनीकांत ने कहा की, भारत के मूल लोगों (हिन्दुओ) के प्रति हमेशा दोहरा मापदंड क्यों अपनाया जाता है जल्लीकट्टू 5000 साल पुराना एक हिन्दू उत्सव है और उसपर तुरंत रोक लगा दिया जाता है
सेकुलरिज्म का इस्तेमाल हमेशा भारत के मूल लोगों (हिन्दुओ) के खिलाफ ही क्यों किया जाता है, सेकुलरिज्म मूल लोगों के लिए और और अल्पसंख्यको के लिए कुछ और
ऐसा कबतक चलेगा !!

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