गुजरात में लगने वाली सरदार पटेल की मूर्ति और नागपुर मेट्रो मेड इन इण्डिया है चाइनीस नही

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देश की देशभक्त जनता चीन निर्मित वस्तुओं का बहिष्कार करने की अपील कर रही है, वहीं देश में रह कर देश के विरोध में बोलने वाले लगातार गलत मैसेज फैला रहे हैं चीन को सरदार पटेल जी की मूर्ति बनाने का ठेका एवं नागपुर में मेट्रो का ठेका दिया, पर वास्तविकता जानें मैं कई दिनों से ऐसे मैसेज देख रहा हूँ, इन बातों को शुरू करने वाले स्वाभाविक रूप से कांग्रेस- एनडीटीवी टाइप लोग हैं परन्तु दुर्भाग्य से भावनाओं में बहकर इसे फ़ैलाने वाले हम राष्ट्रवादी- अति राष्ट्रवादी- उत्तेजित राष्ट्रवादी ही हैं। कुछ प्रश्नों के उत्तर प्रस्तुत हैं

  1. सरदार पटेल की 3000 करोड़ की मूर्ति का ठेका भारतीय कंपनी L&T के पास है न कि चायनीज कंपनी के पास, जिसने केवल ब्रॉन्ज प्लेट चायना से खरीदने हेतु सोर्स की है, जो कुल कीमत का 9% से भी कम है, बाकी सब कुछ स्वदेशी ही प्रयोग होना है, और यह भी कॉन्ट्रेक्टर कंपनी की योजना है। सरकार ने डायरेक्ट चायना को ऑर्डर नहीं दिया है। लिंक देखिये 
  2. सरकार ने जो एल ई डी बल्ब बाँटे हैं उनकी कीमत उसे 10 रूपये पड़ी है, और जिसे 85 रुपये में देकर सरकार ने 75 रूपये प्रति बल्ब सरकार के खाते में इजाफा किया है, साथ ही 2 करोड़ बल्ब बाँट कर 1000 करोड़ प्रति वर्ष की बचत अतिरिक्त की है, इलेक्ट्रिसिटी के रूप में। यूपीए सरकार के समय चायनीज सी एफ़ एल बिकवाई जाती थी, जो महँगी खरीद कर महँगी बेची जाती थी। करोड़ों के वारे-न्यारे होते थे, और बिजली भी बहुत फुँकती थी। मोदी सरकार ने एक तीर से कई शिकार किये हैं, लिंक
  3. नागपुर मेट्रो का प्रोजेक्ट IL&FS engineering and construction company limited के पास है जो 532.67 करोड़ का है।यह कोई चीनी कंपनी नहीं है।यह हैदराबाद की कंपनी है जो भारत के नये राज्य तेलंगाना में स्थित है। हाँ चीन की कम्पनी CRRC को बोगीयों का टेण्डर ओपन एन आई टी के जरिये तीन अलग-अलग कंपनियों के सामने न्यूनतम रेट होने के कारण मिला है, और यह टेंडर देश में मिला उन्हें छठा टेंडर है।
    महत्वपूर्ण बात यह है कि देशहित में टेक्नोलॉजी के आने को नहीं रोका जा सकता, इसलिये, उपभोक्ता क्षेत्र में चीनी सामानों का विरोध होना चाहिए। पर अगर वो टेक्नोलॉजी हमें देते हैं तो कोई विरोध आवश्यक नहीं
    चाहे स्मार्ट सिटी हो, या स्मार्ट रेल-अब लिंक भी लीजिये

ऐसे लोग जो रहते इसी भारत में हैं, खाते भी यहीं का हैं पर बजाते बाहर का हैं।ऐसे लोगों की बातों में ना आयें,क्योंकि ऐसे लोग अपनी सुविधा और व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए किसी भी राजनितिक दल का समर्थन या विरोध करते हैं। देश और समाज उनके लिए गौड़ है,पहले स्वहित। ऐसे लोग समय-समय पर अपनी विचारधारा और डीएनए दोनों बदलते रहते हैं।
चीन को सबक सिखाना है, स्वदेशी को अपनाना है।।

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