बड़ी खबर : समाजवादी पार्टी हार गए मुलायम सिंह नाम और निशान दोनों अखिलेश को

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समाजवादी पार्टी के मुखिया और जन्मदाता मुलायम सिंह अपने सियासी जीवन की सबसे बड़ी जंग हार चुके हैं। पार्टी में दो फाड़ को रोकने की उन्होंने लाख कोशिश की। पार्टी पर अपने कब्जे को बरकरार रखने के लिए वो चुनाव आयोग तक पहुंच गए। लेकिन ये सारी कोशिशें नाकाम हो गई। पार्टी सिंबल साइकिल और नाम के लिए चुनाव आयोग से गुहार लगाने वाले मुलायम को आयोग ने करारा झटका दिया है। आयोग ने साइकिल का निशान और समाजवादी पार्टी का नाम अखिलेश यादव को सौंप दिया है। इसी के साथ साफ हो गया कि अखिलेश यादव ही असली समाजवादी पार्टी हैं। चुनाव से ठीक पहले मुलायम की इस हार के बाद उनके सियासी वजूद को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। चुनाव आयोग में अखिलेश यादव के खेमे ने भी नाम और निशान के लिए अपना दावा पेश कर रखा था।

इसी के साथ ये तय हो गया है कि अखिलेश ही समाजवादी पार्टी के मुखिया हैं। इस से पहले सोमवार को भी मुलायम सिंह यादव ने एक बयान दिया था। उस बयान के आधार पर माना जा रहा था कि उन्हे अंदेशा हो गया है कि चुनाव आयोग इस तरह का फैसला सुना सकता है। इसी लिए उन्होंने कहा था कि वो पार्टी बचाने के लिए लड़ रहे हैं। जरूरत पड़ने पर वो अखिलेश के खिलाफ भी लड़ेंगे। इस बयान ने उत्तर प्रदेश की सियासत को हिला दिया था। मुलायम सिंह ने ये भी कहा था कि अखिलेश यादव मुसलमान विरोधी हैं।आयोग के फैसले के बाद रामगोपाल यादव ने इस बात का भी एलान कर दिया यूपी में महागठबंधन जरूर बनेगा। लेकिन इसका फैसला अखिलेश यादव करेंगे। यानि सपा, कांग्रेस, आरएलडी और जेडीयू के बीच महागठबंधन की अटकलें सही साबित होने वाली हैं।

बता दें कि अखिलेश खेमे की तरफ से रामगोपाल यादव ने चुनाव आयोग में दावा पेश किया था। खास बात ये है कि रामगोपाल ने ही समाजवादी पार्टी का संविधान लिखा था। उनसे ज्यादा कौन ये समझ सकता है कि पार्टी संविधान के मुताबिक क्या सही है और क्या गलत है। यही कारण है कि उनके दावे क शुरू से मजबूत माना जा रहा था। गौरतलब है कि रामगोपाल यादव ने चुनाव आयोग में दावा पेश करने के बाद कई बार कहा था कि वो जो कर रहे हैं सब पार्टी संविधान के आधार पर ही कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ मुलायम सिंह यादव ने बार बार ये कहा था कि रामगोपाल को उन्होंने पार्टी से निकाल दिया है तो वो कैसे अधिवेशन बुला सकते हैं। बहरहाल अब चुनाव आयोग ने इस मामले में अपना फैसला सुना दिया है।

इस हार के साथ ही सवाल खड़े हो रहे हैं कि अब मुलायम सिंह क्या करेंगे। समाजवादी पार्टी उनके हाथ से निकल चुकी है। हालांकि अखिलेश यादव कहते हैं कि पार्टी उनके पिता ही थी और रहेगी। लेकिन सियासी जानकार बताते हैं कि अब मुलायम सिंह के पास दो ही रास्ते हैं या तो वो अखिलेश से सुलह करले और उनकी सारी शर्तें मान ले या फिर नई पार्टी के साथ अखिलेश से मुकाबला करें। इस हार के साथ ही ये भी साफ हो गया कि अमर सिंह और जया प्रदा पार्टी के लिए प्रचार नहीं करेंगे। अमर सिंह ने लंदन जाने से पहले कहा था कि अगर समाजवादी पार्टी में बंटवारा होता है तो वो किसी गुट की तरफ नहीं जाएंगे। चुनाव आयोग के फैसले को बंटवारे की तरह ही देखा जा रहा है। अब जितने भी अखिलेश विरोधी हैं वो भी हैरान और परेशान हो रहे हैं। उनके भी सियासी भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।

 

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