नीतीश कुमार ने दिए संकेत मोदी जी के साथ मिलकर दे सकते हैं लालू को बड़ा झटका

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हाल के दिनों में देश का सियासी माहौल तेजी से बदल रहा है। केंद्र सरकार एक के बाद एक लगातार अहम फैसले ले रही है। इन फैसलों से सियासी दलों में नाराजगी है। खास तौर पर काले धन के खिलाफ सरकारी करवाई से तो विपक्ष बौखला गया दिख रहा है। नोटबंदी के बाद जिस तरह से विपक्षी दलों ने राजनीति की है वो जनता के सामने उनकी छवि के लिए खतरा बन रहा है। ऐसे में मोदी सरकार के लिए बिहार के सीएम नीतीश कुमार बड़ी राहत लेकर आए हैं। नीतीश को मोदी का धुर विरोधी माना जाता रहा है। मोदी के ही कारण नीतीश ने बीजेपी से अपना सालों पुराना गठबंधन तोड़ लिया था। लेकिन अब बदले सियासी माहौल में नीतीश लगातार एक संकेत दे रहे हैं। इन संकेतों को पीएम मोदी द्वारा स्वीकार भी किया जा रहा है।

पहले सर्जिकल स्ट्राइक और उसके बाद नोटबंदी ये दो महत्वपूर्ण फैसले केंद्र की मोदी सरकार ने हाल ही में किए थे। दोनों ही फैसलों के कारण सरकार की लोकप्रियता बढ़ी। जो विपक्ष को नहीं सुहाया। विपक्ष ने दोनों की मुद्दों पर राजनीति की। लेकिन नीतीश कुमार ने इन दोनों मुद्दों पर मोदी सरकार की जमकर तारीफ की। सर्जिकल स्ट्राइक पर नीतीश ने कहा था कि आतंकवाद के मुद्दे पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। पूरे देश को एक साथ खड़े होना चाहिए। वहीं 8 नवंबर को नोटबंदी के बाद9 नवंबर को नीतीश ने इस फैसले का स्वागत किया था। उन्होने कहा था कि सरकार ने अच्छा काम किया है। इस से शुरूआत में लोगों को थोड़ी तकलीफ होगा लेकिन आगे चलकर फायदा आम जनता को ही होगा। यानि कुछ मुद्दों पर नीतीश और मोदी की सोच एक जैसी हो रही है। ये संकेत बिहार में नीतीश के सहयोगी लालू के लिए ठीक नहीं हैं।

अब ये बात धीरे-धीरे साफ होती जा रही है कि पुरानी अदावत को पीछे छोड़कर नीतीश कुमार मोदी की नाव पर बैठने के लिए तैयार दिख रहे हैं। इसका एक और संकेत तब मिला जब नीतीश को दीन दयाल उपाध्याय के जन्म शताब्दी समारोह के लिए बनाई कमेटी में शामिल किया गया। 25 सितंबर को केंदर सरकार ने इस समारोह का आयोजन किया था। यानि भले ही वैचारिक रूपसे एक दूसरे के विरोधी हों लेकिन नीतीश और मोदी के बीच की दूनियां घट रही हैं। संघ मुक्त भारत का नारा देने वाले नीतीश की तरफ से ये संकेत लालू यादव एंड कंपनी के लिए किसी भी सूरत में शुभ नहीं कहे जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक तो यहां तक कहा जा रहा हैकि नीतीश बिहार में खुलकर काम नहीं कर पा रहे हैं। लालू यादव और उनके बेटे सरकार चलाने में काफी समस्याएं खड़ी कर रहे हैं।

इसके अलावा अगर उरी हमले के बाद के हालातों का जिक्र किया जाए तो पीएम मोदी भी लगातार अपने भाषणों में नीतीश कुमार का जिक्र कर रहे हैं। इंटरनेशनल इंटीग्रेशन काउंसिल की बैठक में पीएम नरेंद्र मोदी ने 5 बार नीतीश का जिक्र किया था। पीएम मोदी ने कहा था कि नीतीश के सुझाव अच्छे हैं। जाहिर है कि दोनों नेताओं के बीच संबंध कुछ ठीक हुए हैं। राजनीति के जानकार इसके पीछे वर्तमान राजनीतिक हालातों का हवाला दे रहे हैं। नीतीश ये देख रहे हैं कि उरी हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और अब काले धन के खिलाफ सरकार की कार्रवाई से जनता में प्रधानमंत्री की लोकप्रियता काफी बढ़ गई है। परेशानी के बाद भी जनता सरकार की तारीफ कर रही है। ऐसे में नीतीश खुद को राहुल गांधी, ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल सरीखे नेताओं की जमात से अलग दिखाना चाह रहे हैं। वो नहीं चाहते हैं कि केवल अंधे विरोध के कारण वो जनता की नजरों से उतर जाएं। इसके अलावा एक बात बिहार के प्रशासन से भी जुड़ी है। सूत्रों के मुताबिक बिहार सरकार में लालू यादव का दखल बढ़ता ही जा रहा है। जो सुशासन कुमार की छवि नीतीश ने बनाई थी उसमें दरारें पड़ गई हैं। ऐसे में अब फिर से पुराने तारों को जोड़ने में क्या बुराई है।

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