कुछ मुस्लिम हवस मिटाने के लिए छोटे लड़कों को बनाकर रखते है गुलाम, इसे “लौंडेबाजी” भी कहते है

0

बाल शोषण का काला अध्याय बच्चाबाजी ! एक और विश्व में मानवाधिकार समूह बाल अधिकारों को लेकर सम्बंधित देशो से कड़े कानून बनाने के लिए कहते रहते है तो दूसरी और अफगानिस्तान में इस्लामिक परंपरा के नाम पर बच्चों को दास बनाने और उनका शारीरिक शोषण करने वाली प्रथा बच्चाबाजी एक बार फिर से चलन में आ चुकी है।

अफगानिस्तान में शक्तिशाली राजनीतिज्ञ, सैन्य अफसर, कबीलाई सरदार और अन्य प्रभावशाली व्यक्ति बच्चों को दास की तरह रख सकते हैं। यहाँ बच्चों को दास बनाकर रखना उनके प्रभाव का प्रतीक होता है। दास बनाए गए इन बच्चों को महिलाओं जैसे कपड़े पहनाकर पार्टियों में नचाया जाता है और इनका यौन शोषण भी किया जाता है।

कई अफगान इलाकों में कहावत है कि, औरतें बच्चे पैदा करने के लिए होती हैं और लड़के मजे करने के लिए। बच्चाबाजी के लिए प्रयुक्त होने वाले बच्चे 10 से 18 वर्ष के बीच के होते हैं। या तो वे गरीबी की वजह से इसमें फंसते हैं या फिर उनका अपहरण करके इस पेशे में धकेल दिया जाता है। कई बार गरीब परिवार अपने लड़कों को बेच भी देते हैं।

अफगानिस्तान इंडेपेंडेंट ह्यूमन राइट्स कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार देश में रेप के खिलाफ तो कड़े कानून हैं लेकिन बच्चाबाजी को लेकर यह कानून स्पष्ट नहीं है। अफगान समाज में महिलाओं पर बहुत अधिक पाबंदियां हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि इससे पुरुषों और महिलाओं का संपर्क कम होता है और बच्चाबाजी बढ़ती है।

Loading...

Leave a Reply