मुसलमानों से ये दस सवाल इनको सुनते ही हर मुसलमान तुरंत भाग जाता है

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मुसलमान से दस सवाल !
यह एक कटु सत्य है कि आज भारतीय महाद्वीप में जितने भी मुसलमान हैं , उनके पूर्वज कभी हिन्दू थे , जिनको मुस्लिम बादशाहों ने जबरन मुसलमान बना दिया था . लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि विदेशी पैसों के बल पर इस्लाम के एजेंट ऐसे हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कराने में लगे रहते हैं , जो इस्लाम की असलियत से अनभिज्ञ हैं , या जिनको हिन्दू धर्म का आधा अधूरा ज्ञान होता है , और दुर्भाग्य से ऐसे हिन्दू युवक , युवतियां सेकुलर विचार वाले होते हैं , तो इस्लाम के प्रचारक आसानी से उनको इस्लाम जाल में फसा लेते हैं , इसलिए इस्लाम के चक्कर में फसने से बचने का एक ही उपाय है ,कि इस्लाम के एजेंटों से तर्कपूर्ण सवाल किये जाएँ . क्योंकि इस्लाम सिर्फ ईमान लाने पर ही जोर देता है , और अगर कोई इस्लाम के दलालों से सवाल करता है , तो यातो वह भड़क जाते हैं , या लड़ने पर उतारू हो जाते हैं .
अक्सर देखा गया है कि कुछ उत्साही हिन्दू इस्लाम के समर्थकों के साथ शाश्त्रार्थ किया करते हैं , इसलिए उनकी सहायता के लिए दस ऐसे सवाल दिए जा रहे हैं , जिनका सटीक , प्रमाण सहित और तर्कपूर्ण जवाब कोई मुल्ला मौलवी नहीं दे सकता

1-.मुसलमानों का दावा है कि कुरान अल्लाह की किताब है ,लेकिन कुरान में बच्चों की खतना करने का हुक्म नहीं है , फिर भी मुसलमान खतना क्यों कराते है ? क्या अल्लाह में इतनी भी शक्ति नहीं है कि मुसलमानों के खतना वाले बच्चे ही पैदा कर सके ?और कुरान के विरद्ध काम करने से मुसलमानों को काफ़िर क्यों नहीं माना जाए ?

2-मुसलमान मानते हैं कि अल्लाह ने फ़रिश्ते के हाथो कुरआन की पहली सूरा लिखित रूप में मुहम्मद को दी थी , लेकिन अनपढ़ होने से वह उसे नहीं पढ़ सके , इसके अलावा मुसलमान यह भी दावा करते हैं कि विश्व में कुरान एकमात्र ऐसी किताब है जो पूर्णतयः सुरक्षित है , तो मुसलमान कुरान की वह सूरा पेश क्यों नहीं कर देते जो अल्लाह ने लिख कर भेजी थी , इस से तुरंत पता हो जायेगा कि वह कागज कहाँ बना था ? और अल्लाह की राईटिंग कैसी थी ?वर्ना हम क्यों नहीं माने कि जैसे अल्लाह फर्जी है वैसे ही कुरान भी फर्जी है

3. इस्लाम के मुताबिक यदि 3 दिन/माह का बच्चा मर जाये तो उसको कयामत के दिन क्या मिलेगा.जन्नत या जहन्नुम ? और किस आधार पर ??
4. मरने के बाद जन्नत में पुरुष को 72 हूरी (अप्सराए) मिलेगी…तो स्त्री को क्या मिलेगा…… 72 हूरा (पुरुष वेश्या) .??और अगर कोई बच्चा पैदा होते ही मर जाये तो क्या उसे भी हूरें मिलेंगी ? और वह हूरों का क्या करेगा ?

5. यदि मुसलमानों की तरह ईसाई , यहूदी और हिन्दू मिलकर मुसलमानों के विरुद्ध जिहाद करें , तो क्या मुसलमान इसे धार्मिक कार्य मानेंगे या अपराध ? और क्यों ?

6-.यदि कोई गैर मुस्लिम (काफ़िर) यदि अच्छे गुणों वाला हो तो भी. क्या अल्लाह उसको जहन्नुम की आग में झोक देगा….? और क्यों ?और, अगर ऐसा करेगा तो…. क्या ये अन्याय नहीं हुआ ??

7.कुरान के अनुसार मुहम्मद सशरीर जन्नत गए थे , और वहां अल्लाह से बात भी की थी , लेकिन जब अल्लाह निराकार है , और उसकी कोई इमेज (छवि) नहीं है तो..मुहम्मद ने अल्लाह को कैसे देखा ??और कैसे पहिचाना कि यह अल्लाह है , या शैतान है ?
8- मुसलमानों का दावा है कि जन्नत जाते समय मुहम्मद ने येरूसलम की बैतूल मुक़द्दस नामकी मस्जिद में नमाज पढ़ी थी ,लेकिन वह मुहम्मद के जन्म से पहले ही रोमन लोगों ने नष्ट कर दी थी . मुहम्मद के समय उसका नामो निशान नहीं था , तो मुहम्मद ने उसमे नमाज कैसे पढ़ी थी ? हम मुहम्मद को झूठा क्यों नहीं कहें ?

9-.अल्लाह ने अनपढ़ मुहम्मद में ऐसी कौनसी विशेषता देखी . जो उनको अपना रसूल नियुक्त कर दिया ,क्या उस समय पूरे अरब में एकभी ऐसा पढ़ालिखा व्यक्ति नहीं था , जिसे अल्लाह रसूल बना देता , और जब अल्लाह सचमुच सर्वशक्तिमान है , तो अल्लाह मुहम्मद को 63 साल में भी अरबी लिखने या पढने की बुद्धि क्यों नहीं दे पाया

10.जो व्यक्ति अपने जिहादियों की गैंग बना कर जगह जगह लूट करवाता हो , और लूट के माल से बाकायदा अपने लिए पाँचवाँ हिस्सा (20 %० ) रख लेता हो , उसे उसे अल्लाह का रसूल कहने की जगह लुटरों का सरदार क्यों न कहें ?

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2 COMMENTS

  1. ये रहे जवाब
    1- ख़तना इस्लाम में अनिवार्य नही है, बल्कि सुन्नत है, और बिना ख़तना करवाये भी कोई व्यक्ति मुस्लिम हो सकता है…. मुस्लिम अपने बच्चों का ख़तना क़ुरान के आदेश की बजाए, इसके सुन्नत यानि पुण्य का काम होने की वजह से कराते हैं, और क्योंकि क़ुरान में ख़तना न करवाने सम्बन्धी कोई आदेश नही है, इसलिये ख़तना करवाना अल्लाह के आदेश का उल्लंघन बिलकुल नही है
    2- ये दावा मुस्लिमों ने कब किया कि जिब्रील अ०स० ने नबी सल्ल० को कोई लिखित सूरह दी थी, प्रमाण दिखाइए ? जिब्रील अ०स० ने नबी सल्ल० को पहली और उसके बाद हर बार में भी क़ुरान की सूरतें कंठस्थ कराई थीं न कि किसी कागज़ पर लिख कर दी थीं
    3- अबोध बच्चा मर जाए तो जन्नत में ही जाएगा सभी मुस्लिम विद्वान इस बात पर सहमत हैं क्योंकि वो बच्चा उस आयु को नही पहुंचा था जब वो पाप कर सकता (सही मुस्लिम की हदीस की व्याख्या, 16/207
    4- 72 हूरों का ज़िक्र क़ुरान में कहीं भी नही है, बल्कि ये बात है कि नेक व्यक्तिओं जिनकी मौत विवाह से पहले हो गई थी जन्नत में उनका विवाह जन्नती स्त्रियों से करवा दिया जाएगा, जिन नेक व्यक्तियों के विवाह हो गए थे, तो उन प्रेमी पति पत्नियों को जन्नत में एक दूसरे से मिला दिया जाएगा, तो देखिये विवाहिता स्त्रियों को तो हूरा के रूप में उनके सांसारिक जीवन के पति मिल ही जाएंगे, रही कुँवारेपन में देह त्याग कर चुकी नेक लड़कियां तो उनके विवाह भी जन्नती पुरुषों से कर दिए जाएंगे… क्योंकि क़ुरान में वर्णित शब्द हूर का अर्थ है सुन्दर आँखों वाला साथी, हूर शब्द का कोई स्पेसिफिक जेंडर नही है, पुरुषों के परिप्रेक्ष्य में हूर शब्द स्त्रियों के लिए प्रयुक्त होगा और स्त्रियों के परिप्रेक्ष्य में हूर शब्द पुरुषों के लिए प्रयुक्त होगा
    जो बच्चा जन्मते ही मर जाए, क्योंकि उसके खाते में कोई पुण्य भी नही है अतः कई विद्वानों का मानना है कि ये बच्चे जन्नत में 10-12 वर्ष की अवस्था में बनकर रहेंगे और जन्नत के लोगों की सेवा किया करेंगे.
    5- मुस्लिमों के विरुद्ध संगठित होकर किये जाने वाले युद्ध को हम पाप या पुण्य क्या मानेंगे इसका जवाब देने से पहले हम ये पूछना चाहते हैं कि ये गैर मुस्लिम मुस्लिमों पर आक्रमण करेंगे क्यों ?? मुस्लिम तो पुण्य मानकर किसी से युद्ध नही करते, मुस्लिमों को इस्लाम ने युद्ध की अनुमति केवल आत्मरक्षा में दी है कुरान मे कहीं भी मुस्लिमों को खुद किसी युद्ध को शुरू करने की पहल करने की शिक्षा नहीं दी गई है , लेकिन जब शत्रु खुद बार बार मुस्लिमों पर आक्रमण करने आए तो आत्मरक्षा के लिए मुस्लिमों को तलवार उठाने की अनुमति दी गई, पवित्र कुरान मे ये बात स्पष्ट तौर पर लिखी है
    ‘‘और जो लोग तुमसे लड़ते हैं, तुम भी खुदा की राह मे उनसे लड़ो, मगर ज्यादती (अत्याचार) न करना कि खुदा ज्यादती करनेवालो को दोस्त नही रखता।’’
    (कुरआन, सूरा-2, आयत-190)
    इस्लाम मे कही भी निर्दोषों से लड़ने की इजाजत नही हैं, भले ही वे काफिर या मुशरिक या दिल मे मुस्लिमों से दुश्मनी रखने वाले ही क्यो न हों, ॥ कुरान की सूरह मुम्ताहना की आठवीं आयत मे लिखा है कि जिन लोगों ने तुम मुस्लिमों से तुम्हारे धर्म के कारण जंग नही की और न तुम को तुम्हारे घरो से निकाला, उनके साथ भलाई और इंसाफ का सुलूक करने से खुदा तुमको मना नही करता। खुदा तो इंसाफ करने वालों को दोस्त रखता हैं।
    6- जिस गैर मुस्लिम तक इस्लाम का संदेश सही प्रकार न पहुंचा हो (यानि उसने कभी इस्लाम का संदेश ठुकराया न हो, बल्कि वो अपने जीवन में कभी किसी मुस्लिम से मिला ही न हो, और इस्लाम के बारे में उसने कभी जाना ही न हो) उसके जन्नत में जाने की एक सम्भावना है इस विश्वास की बुनियाद अल-अस्वद बिन सरीअ़ की एक हदीस है जिसमे उन लोगों का जिक्र है जिन तक किसी रसूल का संदेश उनके जीवन मे नहीं पहुंच पाया था, तो अल्लाह तआला कयामत के समय इन लोगों की एक परीक्षा लेगा, और जो व्यक्ति उस समय भी अल्लाह के आगे हठधर्मी दिखाकर अल्लाह की आज्ञा नहीं मानेगा वो नरक मे जाएगा, और जो गैरमुस्लिम व्यक्ति उस समय अल्लाह की आज्ञा मान लेगा वो जन्नत मे भेज दिया जाएगा ….
    इसे इमाम अहमद और इब्ने हिब्बान ने रिवायत किया है, और अल्बानी ने सहीहुल जामिअ़ हदीस संख्या : 881 के अंतर्गत सहीह कहा है।

  2. Bhosdike me dunga tere poore sawaalo Ka jawaab …… 10000 bhagwan waale ….OMG aur PK ne khol Kar le liya tere jhoote Hindu dharam ki….saala chor bhagwan Krishna chor

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