मोदी से बेहद नफरत करती थी ये मुस्लिम महिला, पर अब बन चुकी हैं मोदी भक्त

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2002 के दंगों के बाद सुनी सुनाई बातों की वजह से इनको भी लगता था मोदी बेहद ख़राब आदमी हैं और मुस्लिमों से नफ़रत करते हैं । लेकिन मोदी से केवल 55 मिनट की एक मुलाकात ने आसिफा खान की राजनीतिक सोच बदल दी। हालाँकि उन्होंने ये मुलाक़ात शिकायत करने और विरोध दर्ज करने के लिए की थी। बता दें कि आज वे भाजपा का बेहद जाना पहचाना मुस्लिम चेहरा है।

आसिफा के भाजपा में शामिल होने की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। बकौल आसिफा,जब मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब वे उनसे मिलने गई थी। उन्हें साफ़ साफ़ अंदाज़ा नहीं था मोदी जी से ये मुलाक़ात कैसी होगी। पर मोदी जी तो हैं ही ऐसे जिससे मिलते हैं दिल जीत लेते हैं । बता दें कि आसिफ़ा ने मुख्यमंत्री कार्यालय से मोदी से मिलने के लिए वक्त मांगा था तो मोदी जी ने केवल 5 मिनट का वक्त दिया था लेकिन यह मीटिंग 55 मिनट चली थी। जान लें कि यह बात 20 अक्टूबर 2012 की है।

आसिफा खान मूलत: गुजरात राज्य के भरूच जिले की रहने वाली है और इसी ज़िले से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सोनिया गांधी के ख़ासमखास अहमद पटेल भी आते हैं । आसिफा की राजनीति में दिलचस्पी उस वक्त जगी जब वह पीएसयू बेस्ड गुजरात नर्मदा फर्टिलाइजर लिमिटेड (जीएनएफसी) की ओर से संचालित स्कूल में बतौर टीचर थी । इसी स्कूल में आसिफा के शौहर भी काम करते थे । सबसे पहले आसिफा ने दूसरे मुस्लिमों की तरह 2008 में कांग्रेस ज्वाइन की और कांग्रेस से राजनीतिक सफ़र की शुरूवात की

उनके बारे में और बात करें तो आसिफा अंग्रेजी लिटरेटर में पोस्ट ग्रेजुएट है । जब वे कांग्रेस में थी तब उनका काम युवराज राहुल गांधी के गुजरात दौरे से पहले के सभी प्रोग्राम तय करना और उनके लिए बैकग्राउंड मैटेरियल प्रदान कराना था। आसिफा की बेटी की शादी हो चुकी है और बेटा कॉलेज में पढ़ रहा है। बकौल आसिफा भाजपा में वह किसी मध्यस्थ के जरिए नहीं आई , यानी किसी ने उन्हें भाजपा में आने के लिए नहीं कहा और ना ही कोई नेता था जिसकी मार्फ़त उन्होंने भाजपा Join की ।

हुआ यूँ कि लोगों की समस्याओं के प्रति बड़े बड़े कांग्रेस नेताओं की संवेदनहीनताको देखते हुए आसिफा का मोह भंग हो गया था उन्हें लगा ये पार्टी किसी का भला नहीं कर सकती बस बातें कर सकती है इसलिए वे भाजपा में शामिल हुई थी। आसिफ बताती हैं कि मैं भुज, सूरत, बारडोली, भावनगर और गुजरात के गरीब से ग़रीब मुस्लिम परिवारों से मिली हैं। उन्होंने ज़मीनी स्तर पर काम किया पर उनका कांग्रेस की लीडरशिप से मोहभंग हो गया क्योंकि उनके ( कांग्रेस) पास मुस्लिमों के लिए कोई विजन नहीं था बस उनका उपयोग करने की मानसिकता ही थी ।

आसिफा ख़ुद बताती हैं कि अपने शहर भरूच में एक बेहद पुराने और जर्जर पड़ चुके अस्पताल को फिर शुरू कराने के मोदी जी के प्रयास से वे बेहद प्रभावित हुई लेकिन फिर भी उनके मन में 2002 के लिए संदेह थे क्यूँकि उन्हें इसी तरह मोदी जी के ख़िलाफ़ भड़काया गया था। वे कहती हैं कि मोदी जी ने बिना किसी भेदभाव के गुजरात में विकास किया , जो मुसलमानों के लिए बहुत जरूरी है।

वे कहती हैं कि कांग्रेस की दिखावे वाली और केवल वोट बैंक वाली तुष्टीकरण की नीति से कुछ नहीं होने वाला है। किसी भी मुस्लिम का भला कांग्रेस के नारों और कार्यों से नहीं हुआ। मुसलमानों के अंदर आसिफा के बढ़ते हुए प्रभाव को देखते हुए उन्हें राज्य बीजेपी की इकाई से निकालकर बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चे की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में भेज दिया गया था और अब वे भाजपा की प्रवक्ता भी हैं ।

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