मीडिया ने 33 लाख के साथ गिरप्तार जिसे बीजेपी नेता बताया वो असल में निकला TMC नेता

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भारत के पाठको को हमेशा आगाह करते रहते है की वो, हिंदुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ़ इंडिया, आजतक, एबीपी न्यूज़, NDTV इत्यादि की ख़बरों पर आँख मूंदकर भरोसा न करें

ये लोग सेक्युलर एजेंडे पर चलते है, और इनका मुख्य काम पत्रकारिता नहीं बल्कि हिन्दू और भारत विरोध है और इन लोगों की मक्कारी फिर पकड़ी गयी

आपने पिछले दिनों इन मीडिया वालो की खबर पढ़ी और सुनी होगी की, “कोलकाता में बीजेपी का नेता मनीष शर्मा 33 लाख के नोटों और हथियारों के साथ पकड़ा गया, नोट भी नए वाले”

देखिये कुछ प्रमुख ख़बरों का स्क्रीनशॉट, जिसमे ये तीन प्रमुख तथाकथित अख़बार स्वयं ही कंफ्यूज है

* इंडियन एक्सप्रेस ने मनीष शर्मा को बीजेपी का नेता बताया
* हिंदुस्तान टाइम्स ने मनीष शर्मा को बीजेपी का सस्पेंडेड नेता बताया, जिसे ससपेंड किया गया हो
* वहीँ NDTV ने मनीष शर्मा को बीजेपी से निकाला हुआ नेता बताया

अब आप स्वयं सोचिये कौन सी मीडिया एजेंसी सच बता रही है अब आपको हम पूरी सच्चाई बता देते है, इस कोलकाता के मनीष शर्मा की, जिसके सहारे मीडिया बीजेपी पर निशाना साध रही थी

दरअसल मनीष शर्मा बीजेपी का ही नेता था, लेकिन पिछले पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी के टिकेट पर हारने के बाद उसने ममाता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस पार्टी को ज्वाइन कर लिया और पिछले साल भर से मनीष शर्मा पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का जिला जनरल सेकरेटरी है

ये बीजेपी का नेता नहीं बल्कि तृणमूल का जिला जनरल सेकरेटरी है, पर मीडिया वालो ने ममाता बनर्जी की पार्टी का एक बार भी नाम तक नहीं लिया और नहीं बताया की तृणमूल का जिला जनरल सेकरेटरी 33 लाख के नोटों के साथ हुआ गिरफ्तार बीजेपी को बदनाम करने की इतनी जल्दी रहती है की ये मीडिया वाले झूठ का सहारा लेते है और ये अक्सर पकडे जाते है ये है इस मीडिया की सच्चाई जिसपर देश के बहुत से लोग आँख मूंदकर भरोसा करते हैं

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