मसूरी के हिन्दुओं ने पाक परस्त कश्मीरियों को सिखाया ऐसा तगड़ा सबक़ कि काँप उठे देशद्रोही

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जिस रात चैंपियंस ट्राफी के फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान (Pakistan) जीत गया, उस रात शांत और खूबसूरत मसूरी (Mussoorie) शहर में वो हुआ जो इससे पहले कभी नहीं हुआ ।

मसूरी की शांति भी भंग हुई , भारत विरोधी नारे लगे, पाकिस्तान जिंदाबाद कहा गया, कश्मीर (Kashmir) की आजादी ले कर रहेंगे जैसे कुछ नारे, कश्मीरी चरमपंथी दुकानदारों ने लगाये ।

मसूरी निवासी अचम्भे में थे की उनके शहर में ऐसा कैसे? तुरंत कुछ वरिष्ट व्यापारी स्थानीय भाजपा नेता से मिले और कुछ कठोर निर्णय लिए, कुछ ऐसे निर्णय जो केवल उस रात की नारेबाजी की वजह नहीं लिए गए बल्कि पिछले कुछ साल से मसूरी के बाजारों में जो चल रहा है उसे रोकना जरूरी था, और वो है मसूरी का इस्लामीकरण (Islamisation)।

पिछले कुछ वर्षो में मसूरी शहर में भरी संख्या में कश्मीरी दुकानदार आये। मसूरी वासियो ने उनका वैसे ही स्वागत किया जैसे वे सभी का करते है पर ये दुकानदार बाज़ार भाव से कहीं ज्यादा किराया दे कर दूकान लेने लग गए, कहीं कहीं तो जो दूकान का किराया 60 हज़ार होना चाहिए, वहां ये 1 लाख तक दे रहे है। मसूरी में बहुत सारे कॉर्पोरेट ने भी अपनी दूकान और ऑफिस खोले पर कमाई ज्यादा नहीं होने पर बिस्तर बांध करचल दिए , वैसे में ये सवाल उठाना जयाज हो जाता है कि कॉर्पोरेट अपनी दूकान बंद कर रहे पर फिर कश्मीरी मुस्लिम लोग दूकान की कमाई ना होने पर भी इतना ज्यादा किराया दे कर व्यापार क्यूँ कर रहे है ?

सीधा सवाल ये उठता है , अरे भाई नुक्सान में कोई व्यापार करेगा क्या? और अगर करेगा तो जरूर उनके व्यवसाय का कारण व्यासायिक मुनाफे के अलावा भी कुछ होना चाहिए।

तो क्या ये किराए का पैसा मुनाफ़े के अलावा इसलिए तो नहीं लगाया जा रहा ताकि मसूरी और आस पास के क्षेत्रों में जनसँख्या का अनुपात बदला जाय ? या फिर मसूरी को आतंकियों का छुपने का ठिकाने के तौर विकसित किया जा रहा है ?

हाल के वर्षो में ये भी पाया गया की कश्मीरी मुस्लिमों की दुकानों पर काम करने वाले लड़के अक्सर बदल जाते है, कोई भी काम करने वाला 5-6 महीने से ज्यादा टिकते नहीं हैं, ऐसे में पुलिस को भी सत्यापन करना मुश्किल होता है कि कौन दूकान में काम करने वाला लड़का है और कौन भगा हुआ आतंकी ?

एक और कारण ये भी हो सकता है कि जिहादी तत्वों के द्वारा मसूरी में उत्पात करवा दिया जाए, जिससे पर्यटन उद्योग पर बुरा असर पड़े। इन सभी बातो को ध्यान में रकते हुए मुसरी के व्यापारियों ने जो साहसिक निर्णय लिया है, वो पुरे देश के लिए एक Example है।

पहला निर्णय यह लिया गया कि 1 मार्च 2018 से कोई भी दुकानदार कश्मीरी को किराए पर जगह नहीं देगा। दूसरा, मौजूदा कश्मीरी किरायेदार को फरवरी 2018 तक जगह को हर हाल में खाली करना होगा। और फिर मार्च 2018 से बड़े पैमाने पर हर कश्मीरी मुस्लिमों का सत्यापन किया जाएगा । जो कश्मीरी मुस्लिम पाकिस्तान को अपना बाप मान कर उसके लिए भारत जिंदाबाद कहते है, उनको मसूरी के व्यापारियों ने अपने इस निर्णय से करारा तमाचा लगाया है ।

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