ममता बनर्जी मोदी जी के फैसले के बाद एक झटके में गरीब हो गयीं चंदा मांग कर पार्टी चला रही हैं

0

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पहली नेता है जिन्होंने 8 नवम्बर को प्रधानमंत्री मोदी का भाषण सुनते ही नोटबंदी को “अत्याचारी, निर्दयी” फैसला बता दिया था ममाता बनर्जी अपने सारे काम छोड़कर, दिल्ली, लखनऊ, पटना घूम रही है, किसी भी तरह मोदी पुराने नोटों को फिर से लागू कर दे, इसी जुगाड़ में हैं ममाता बनर्जी

ममाता बनर्जी नोटबंदी से इतना परेशान है की, मरने मारने, जीने तक की बाते कह रही है “या तो जिऊंगी, या तो मरूँगी पर मोदी को भारतीय राजनीती से हटा के फेंकूँगी”

ममाता यूँ ही नहीं कर रही जीने मरने की बातें, इसका कारण ये है की मोदी ने पूरी राजनीती की दुकान ही खतरे में डाल दी, और वर्षों से वो दूकान चला रही ममाता बिलबिलायेंगी ही

अंदर की बात ये है की, ममाता बनर्जी की पार्टी तृणमूल की आर्थिक हालत ख़राब हो गयी है  तृणमूल ने अपने सभी रेगुलर कार्यकर्तों, जिला अध्य्क्ष, वार्ड प्रमुखों, सचिवों इत्यादि से हर सप्ताह पार्टी फण्ड में 100-100 रुपए जमा करने का फरमान सुनाया है

पार्टी चाहती है की कार्यकर्त्ता मुश्किल के इन दिनों में पार्टी चलाने के लिए 100 रुपए का चंदा हर महीने दे. ताकि तृणमूल की राजनीतीक गतिविधियां चलाई जा सके बता दें की केवल ममाता ही नहीं बल्कि कांग्रेस की स्तिथि भी कुछ ऐसी ही है
महाराष्ट्र में म्युनिसिपल कॉन्सिल चुनावों के लिए भी कांग्रेस ने कार्यकर्तओं से पैसे देने की अपील करी थी

नरेन्द्र मोदी के फैसले से इन राजनीती चलाने वालो की नींदे हराम कर दी  चूँकि इनके पास जितने 500-1000 के नोट थे, वो सब उनअकाउंटेड थे, यानि काला धन थे, उसी से राजनीती चला करती थी पर नरेन्द्र मोदी ने सब बर्बाद कर दिया

Loading...

Leave a Reply