मजहब में कोर्ट दखल नहीं देगी, लेकिन धर्म में दखल देगी, ये कानून चल रहा है या मजाक

0

3 तलाक अगर मजहब से जुड़ा हुआ है तो सुप्रीम कोर्ट उसमे दखल नही देगा ! ठीक है पर ज़रा ये बताइये .. फिर अयोध्या राम जन्म भूमि पर सुनवाई किस आधार पर हो रही है क्या ये हिन्दुओ के धर्म से जुड़ा धार्मिक मामला नही है ….

फिर किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दू बहुविवाह को प्रतिबंध किया .. एक से अधिक पत्नी रखना तो किसी भी हिन्दू धार्मिक शास्त्र में अपराध नही है क्या ये दोगलापन नही है .. चार शादियां  3 तलाक , हलाला , मुताहा , ये सब मज़हबी है तो  हिन्दू धर्म क्या धर्मशाला है

जिस के हर फैसले कोर्ट करेगा ?

राम कहाँ पैदा हुए ये कोर्ट बतलायेगा लेकिन.. कोई अपनी बहन बेटी मुताहा के नाम पर विदेशों में बेच देगा तो वो शरीयत के हिसाब से जायज़ होगा उसमे कोर्ट दखल नही देगा सती प्रथा एक कुरीति थी, तो हलाला रीती कैसे हुई सती प्रथा में तो नारी प्राण देकर सतीत्व को धारण करती थी हलाला में तो अपना स्वाभिमान देकर ज़िंदा लाश बन जाती है …

मुझे एक भारतीय होने के नाते भारत के सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान करना चाहिए और मैं सम्मान करता भी हूँ पर कानून की देवी ने जो आँखों पर काली पट्टी बांध रखी है उसे उतार कर फैसला करें वरना एक दिन ऐसा आएगा कि कानून की देवी बुरखा पहने हुए नज़र आएगी

Loading...

Leave a Reply