ब्लड शुगर या फिर मधुमेह का रामबाण प्रयोग और आयुर्वेदिक उपचार

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मधुमेह का रामबाण प्रयोग और आयुर्वेदिक उपचार : ब्लड शुगर अर्थात मधुमेह को नियंत्रित करना आज एक बहुत बड़ी चुनोती बन गया है, मगर आयुर्वेद और घरेलु ज्ञान इतना प्रबल है के इस पर विश्वास रख कर इसको निरंतर करने से कितना भी प्रबल रोग हो सही होता है। अनेको लोगों ने इनको अपना कर अपनी मधुमेह को नियंत्रित किया है तो अब आपकी बारी है। इसके लिए ज़रूरत है बस निरंतरता और परहेज की। आइये जानते हैं ये रामबाण प्रयोग। सबसे पहले तो मधुमेह रोगियों को अपनी दिनचर्या में दो काम ज़रूर शामिल करने हैं एक है योग और दूसरा है सैर

मधुमेह का रामबाण प्रयोग और आयुर्वेदिक उपचार

मधुमेह रोग में खून में शर्करा स्तर बढ जाता है| भारत में शुगर रोगियों की संख्या में बडी तेजी से वृद्धि देखने में आ रही है।इस रोग का कारण प्रमुख रूप से इन्सूलिन हार्मोन की की गड्बडी को माना जाता है।तनाव और अनियंत्रित जीवन शैली से इस रोग को बढावा मिलता है।

मधुमेह (diabetes) के कारण

1. व्यायाम का अभाव
2. मानसिक तनाव
3. अत्यधिक नींद
4. मोटापा
5. चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट के अत्यधिक सेवन
6. वंशानुगत कारकों

मधुमेह (diabetes) के लक्षण

मधुमेह होने के कई लक्षण रोगी को स्वयं अनुभव होते हैं।
1. बार-बार रात के समय पेशाब आते रहना।
2. आंखों से धुंधला दिखना।
3. थकान और कमजोरी महसूस करना।
4. पैरों का सुन्न होना।
5. प्यास अधिक लगना।
6. घाव भरने में समय लगना।
7. हमेशा भूख महसूस करना।
8. वजन कम होना।
9. त्वचा में संRमण होना।
10. मूत्र बार-बार एवं अधिक मात्रा में होना तथा मूत्र त्यागने के स्थान पर मूत्र की
9)  सोयाबीन,जौ और चने के मिश्रित आटे की रोटी खावें,इससे शुगर का स्तर कम करने में काफ़ी मदद मिलती है।

10)  मांस और वसायुक्त भोजन हानिकारक है।

11)  प्रतिदिन २४ घन्टे में ३-४ लिटर पानी पीने की आदत डालें।
12) हरी सब्जीयां,फ़ल और रेशे वाली चीजें भोजन में प्रचुर मात्रा में लें। शकर, मीठे फ़ल से परहेज करें।
१३)  गरम पानी भरे बर्तन में १०-१५ आम के पत्ते डाल कर   रात भर  रखें  सुबह छानकर  पियें  मधुमेह का कारगर नुस्खा है|
१४) अपनी आयु के हिसाब से २ से ४ किलोमिटर नित्य घूमना जरूरी है।

मधुमेह के लिए रामबाण घरेलु उपाय :

1. 3 ग्राम बबुल के शुद्ध गोंद का चूर्ण दूध के साथ खाने से बहोत लाभ मिलता है।

2. बेल के जड़ो को कूटकर चूर्ण बना लीजिये और छानकर रख दीजिये। 1 चम्मच चूर्ण लेकर उसमे आधा चम्मच बेल के पत्तो का रस मिलाकर सुबह खाली पेट और शाम को खाली पेट खानी है। (5 दिन)

3. अमलतास के थोड़े से गुदे को लेकर गरम करे और उसकी मटर के दाने इतनी गोलिया बनाये। 2 गोली सुबह और 2 गोली शाम को खाली पेट लेने से शुगर में आराम होगा।

4. 2 लहसुन की पुत्तियों का रस बेल के पत्तो के रस के साथ सुबह के समय सेवन करने से आराम होता है।

5. 6 ग्राम पाषाणभेद, 40 मिली हरी ताज़ी गिलोय का रस और 6 ग्राम असली शहद के साथ 1 माह तक सेवन करने से शुगर की बीमारी जड़ से मिट जाती है। यह बहुत अनुभवी नुस्खा है जो कई मरीजो पर आजमाया गया तथा सही साबित हुआ। आप भी आजमाकर देखे। परमात्मा ने चाहा तो आपको जरूर लाभ होगा।

मधुमेह का घरेलु उपाय

सामग्री

1- मेथी का दना – 100 ग्राम
2- तेज पत्ता ——- 100 ग्राम
3- जामुन की गुठली -150 ग्राम
4- बेलपत्र के पत्ते – 250 ग्राम

100 ग्राम (मेथी का दाना )ले ले इसे धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !

100 ग्राम (तेज पत्ता ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !

150 ग्राम (जामुन की गुठली )लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !

250 ग्राम (बेलपत्र के पत्ते ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !

तो इन सबका पाउडर बनाकर इन सबको एक दूसरे मे मिला लें ! बस दवा तैयार है !! इसे सुबह -शाम (खाली पेट ) 1 से डेड चम्मच से खाना खाने से एक घण्टा पहले गरम पानी के साथ लें !! 2 से 3 महीने लगातार इसका सेवन करें !! (सुबह उठे पेट साफ करने के बाद ले लीजिये )

मधुमेह का रामबाण इलाज मेथी दाना और कलौंजी

कलौंजी और मेथीदाना बराबर मात्रा में थोडा दरदरा (दलिये की तरह) पिसवा लीजिये, दोनों को मिला कर एक कांच की बरनी में सुरक्षित संभाल कर रख लीजिये, रात को एक गिलास पानी में एक चम्मच ये चूर्ण डाल दीजिये, सुबह इस को पानी से अलग कर के चबा चबा कर खा लीजिये और यही पानी घूँट घूँट कर पी लीजिये। किसी भी लेवल पर शुगर हो यह प्रयोग बहुत कारगर है और मात्र 2-3 महीने में मधुमेह को नियंत्रित करने में सक्षम है।

मधुमेह का इलाज

काली जामुन

मधुमेह रोगियो के लिये यह फल बहुत ही लाभकारी है। इसके बीजो़ को पीस कर खाने से मधुमेह कंट्रोल होता है।

चैरी

इसमें जीआई मूल्‍य 20 होता है जो कि बहुत कम माना जाता है। यह मधुमेह रोगियों के लिये बहुत ही स्‍वास्‍थ्‍य वर्धक मानी जाती है।

अमरूद

अमरूद में विटामिन ए और विटामिन सी के अलावा फाइबर भी होता है।

अनानास

इसमें एंटी बैक्‍टीरियल तत्‍व होने के साथ ही शरीर की सूजन कम करने की क्षमता होती है। यह शरीर को पूरी तरह से फायदा पहुंचाता है।

पपीता

इसमें विटामिन और अन्‍य तरह के मिनरल होते हैं।

मधुमेह के लिए योगा

हर रोज़ 15 मिनट कम से कम योग ज़रूर करे, इसमें भी विशेष 5 मिनट मंडूकासन ज़रूर करे। और कपाल भाति, अनुलोम विलोम जैसे प्राणायाम भी ज़रूर करे।मंडूकासन से पैंक्रियास इन्सुलिन का स्त्राव करना शुरू कर देता हैं जिस से शरीर में फैली ग्लूकोस शरीर के सेल्स ग्रहण कर लेते हैं। और शरीर में शुगर का स्तर कंट्रोल होता हैं।

सुबह की सैर

सुबह उठ कर पार्क वगैरह पर घूमने जाइए, जितना गति से आसानी से दौड़ लगा सकते हैं दौड़ ज़रूर लगाये। थोड़ी देर कंकर पत्थर वाली जगह पर नंगे पाँव ज़रूर चले। इस से एक्युपंचर होगा, जो मधुमेह के रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद हैं।

मधुमेह के लिए रामदेव का इलाज

श्री बाबा रामदेव जी ने डायबिटीज के कंट्रोल के लिए बहुत जबरदस्त दवा बनायीं है जिसका नाम है “मधु नाशिनी वटी” (baba ramdev patanjali products Divya Madhunashini Vati for Diabetes cure)  इस दवा में बहुत सी शक्तिशाली जड़ीबूटियों का मिश्रण है जो खून में शुगर लेवल जरूर कम करती है  पर इस दवा के फायदा करने में जो चीज सबसे मुख्य है कि आप इस दवा की कितनी गोली और कितने बार खाते है क्योकि कई बार लोगो को उनकी डायबिटीज की गंभीरता के हिसाब से 2 – 2 गोली करके एक दिन में 10 गोली तक मधु नाशिनी वटी की खाते हुए देखा गया है जबकि कई लोग एलोपैथिक की कड़ी से कड़ी दवा शुगर कंट्रोल के लिए ले लेते है पर मधुनाशिनी 4 गोली से ऊपर लेने में हिचकते है तो  ऐसे में यही बेहतर होता है की किसी योग्य आयुर्वेदिक डॉक्टर से मिलकर अपनी दवा की मात्रा तय कर लेना चाहिए और हाँ मधुनाशिनी को जब भी खाए एक बार में 2 गोली से ज्यादा ना खाए मतलब अगर आपको ज्यादा गोलियां खानी हो तो आप 2 – 2 गोलिया कुछ कुछ घंटों के गैप पर खा लें मधुनाशिनी को हमेशा खाने या नाश्ते के कम से कम 10 – 15 मिनट पहले खाना चाहिए या चिकित्सक की सलाह पर मधुनाशिनी को एकदम सुबह खाली पेट भी लिया जा सकता है (क्योंकि ज्यादातर आयुर्वेदिक दवायें सुबह सुबह एकदम बासी मुंह लेने पर सबसे तेज फायदा करती है) !

मधुमेह के लिए राजीव दीक्षित का इलाज

त्रिफला अर्थात तीन फल ! कौन से तीन फल !

1) हरड़ (Terminalia chebula)
2) बहेडा (Terminalia bellirica)
3) आंवला (Emblica officinalis)

एक बात याद रखें इनकी मात्रा हमेशा 1:2:3 होनी चाहिए ! 1 अनुपात 2 अनुपात 3 !

बाजार मे जितने भी त्रिफला चूर्ण मिलते है सब मे तीनों की मात्रा बराबर होती है ! बहुत ही कम बीमारियाँ होती है जिसमे त्रिफला बराबर मात्रा मे लेना चाहिए !!
इसलिए आप जब त्रिफला चूर्ण बनवाए तो 1 :2 :3 मे ही बनवाए !!

सबसे पहले हरड़ 100 ग्राम , फिर बहेड़ा 200 ग्राम और अंत आंवला 300 ग्राम !!
इन तीनों को भी एक दूसरे मे मिलकर पाउडर बना लीजिये !! और रात को एक से डेड चमच गर्म दूध के साथ प्रयोग करें !!

 

 

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