लहसुन पाक सबसे उत्तम शक्ति दायक ही नही ये अनेक रोगों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दे

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मर्दाना ताक़त, जोड़ो का दर्द , (सन्धिवात ), सायटिका, हिचकी, श्वास, सिर दर्द, अपस्मार, गुल्म, उदर रोग, प्लीहा, कृमि, शौथ, अग्निमान्ध, पक्षाघात, खांसी, शूल आदि के लिए उत्तम औषिधि – लहसुन पाक। लहसुन पाक पोष्टिक आहार के रूप में वाजीकारक योग हैं। विवाहित पुरुषों के लिए यौन शक्तिदायक वृद्धक तो होता ही है साथ ही शरीर की सप्त धातुओं को पुष्ट और सबल करके शरीर को सुडौल और बलवान बनाने वाला भी है।

बनाने की विधि

लहसुन की 100 ग्राम कलियोँ को , इनका छिलका अलग करके , काट कर छोटे-छोटे टुकड़े कर लें। एक लीटर दूध में एक गिलास पानी डाल कर, ये सभी टुकड़े डाल दें और गरम होने के लिए रख दें। उबल जाने पर जब दूध गाढ़ा हो जाये और मावा जैसा बन जाये तब उतार कर ठंडा कर लें और मिक्सी में पीसकर लुगदी बना लें। एक कढाई में थोडा सा शुद्ध देशी घी गरम करके इस लुगदी को डाल दें और धीमी ( मंदी ) आंच पर पकाएं। जब लाल हो जाये तब इसे उतार लें यदि घी बच जाए तो अलग कर लें। अब इसमें आवश्यक मात्रा में शक्कर की चाशनी तैयार करें। भुनी हुई लुगदी और केशर 1 ग्राम, लौंग 2 ग्राम, जायफल 2 ग्राम, दालचीनी 2 ग्राम, और सौंठ 5 ग्राम — इन सबको बारीक़ पीसकर चाशनी में डाल दें और भली-भांति मिला लें और थाली में फैला कर जमा लें यही लहसुन पाक है

लाभ और प्रयोग विधि

यह पाक सुबह शाम ( रात को सोने से पहले ) एक-एक चम्मच की मात्रा में, मिश्री मिले हुए हलके गरम दूध के साथ कम से कम 60 दिन तक सेवन करना चाहिए।
इसके सेवन से जोड़ो का दर्द, (सन्धिवात ), सायटिका, हिचकी, श्वास, सिर दर्द, अपस्मार, गुल्म, उदर रोग, प्लीहा, कृमि ,शौथ, अग्निमान्ध, पक्षाघात, खांसी, शूल, आदि अनेक रोगों को निरोगी बनाने में सहायक होता है तथा स्नायविक संस्थान की कमजोरी, व यौन शिथिलता दूर करके बल प्रदान करता है। एसे रोगों से ग्रस्त रोगी के अलावा यह पाक प्रौढ़ एवम वृद्ध स्त्री पुरुषों के लिए शीतकाल में सेवन योग्य उत्तम योग है।

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