खतरनाक किन्तु सत्य “कुरान की पोल हदीस ने खोली”

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इस्लामी मान्यता है कि कुरान अल्लाह की किताब है . जो 23 के अन्दर रसूल पर उतरी थी . और उसमे अल्लाह के वचन हैं.और उसी तरह हदीसों में भी रसूल के वचन मौजूद हैं.इस से इस्लाम से अनभिज्ञ लोगों ऐसा भ्रम हो जाता है कि कुरान और हदीसों में लोगों को चरित्रवान बनने और आत्मज्ञान सम्बन्धी उपदेश दिए होंगे .क्योंकि अधिकांश लोग यह नहीं जानते कि कुरान की सूरा ( अध्याय ) कालक्रम ( Chronological Order ) के अनुसार नहीं हैं . और हदीसें कुरान के काफी समय बाद जमा की गयी थीं .
इसके कारण कुरान की ऐसी कई आयतें हैं ,जिनका अर्थ अस्पष्ट है .फिर भी चालाक मुल्ले उनकी ऐसी व्याख्या कर देते हैं ,जो बाहर से तो ऐसी लगाती है कि जिसपर कोई आपत्ति नहीं कर सकता है . लेकिन जब हदीस से उसी आयत की सही व्याख्या पढ़ते हैं , तो कुरान महानता के ढोल की पोल खुल जाती है .यहाँ एक आयत दी जा रही है ,जिसकी व्याख्या करके मुस्लिम विद्वान् अल्लाह को सर्वदर्शी साबित कर देते हैं .

क्या अल्लाह सर्वदर्शी है

मुसलमान अक्सर दावा करते रहते हैं कि उनका अल्लाह सब कुछ देख सकता है यानि वह “Omniscient”है .यानि अल्लाह की नजर से कुछ भी चीज या लोगों के काम नहीं छुप सकते .जैसा कि इस आयात में कहा गया है ,
“देखो यह लोग अपने सीनों को मोड़ लेते हैं .ताकि ऐसा करने से छिप जाएँ ,लेकिन जान लो कि जब भी यह लोग इस तरह से खुद को अपने कपड़ों में छुपा लेते हैं ,तो अल्लाह वह सब कुछ देख लेता है ,जो यह लोग छिपा लेते हैं .और अल्लाह तो उनके सीनों अन्दर की चीज भी देख लेता है ”
“أَلَا إِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ لِيَسْتَخْفُوا مِنْهُ أَلَا حِينَ يَسْتَغْشُونَ ثِيَابَهُمْ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ ”
सूरा -हूद 11 :5
कुरान के हिंदी अनुवाद में इस आयत की तफ़सीर (व्याख्या )में इस का खुलासा करते हुए टिपण्णी में लिखा है “मक्का के लोग रसूल की बातें सुनने से कतराते थे .और उनको देखते ही यातो मुंह मोड़ कर चल देते थे ,या अपने सीनों को मोड़ कर (झुक कर ) खुद को कपड़ों में छिपा लेते थे ( कुरान मजीद-कुरान का हिंदी अनुवाद पेज -415 ,अनुवादक फारूख खान ,मकतबा अल हसनात ,रामपुर .)
जिस तरह जकरिया नायक जैसे चालाक व्यक्ति कुरान की बेसिर पैर की आयतों व्याख्या करके , अल्लाह को ईश्वर साबित करने का कुप्रयास करते रहते हैं ,उसी तरह फारुख खान ने भी इस अर्थहीन आयत की व्याख्या करते हुए अल्लाह को , सर्वज्ञ और सर्वदर्शी साबित करना चाहा है . लेकिन खुद मुहम्मद साहब की हदीस ने इस आयत की पोल खोल दी है ,देखिये हदीस क्या कहती है ,

अल्लाह की गन्दी नजर

मुहम्मद बिन अब्बास बिन जाफर ने कहा कि जब लोगों ने रसूल के मुंह से (सूरा हूद 11 :5 ) सुनी . कि लोग अपने सीनों को मोड़ लेते है , तो रसूल से इसका मतलब पूछा . रसूल ने बताया कि हमारे साथी खुल्लम खुल्ला बिना किसी आड़ के मैदान में ही नित्य क्रिया और औरतों से सम्भोग करने के आदि है .और जब अचानक कोई उनको ऐसा काम करते हुए देख लेता है ,तो यह लोग खुद को छुपाने के लिए सीनों को मोड़ लेते हैं .ताकि कोई पहचान नहीं सके . इसी लिए यह आयत उतरी है .

“Jafarحَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ صَبَّاحٍ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ قَالَ قَالَ ابْنُ جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِى مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادِ بْنِ جَعْفَرٍ أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ عَبَّاسٍ يَقْرَأُ ( أَلاَ إِنَّهُمْ تَثْنَوْنِى صُدُورُهُ مْ
) قَالَ سَأَلْتُهُ عَنْهَا فَقَالَ أُنَاسٌ كَانُوا يَسْتَحْيُونَ أَنْ يَتَخَلَّوْا فَيُفْضُوا إِلَى السَّمَاءِ ، وَأَنْ يُجَامِعُوا نِسَاءَهُمْ فَيُفْضُوا إِلَى السَّمَاءِ ، فَنَزَلَ ذَلِكَ فِيهِمْ

सही बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 203
Arabic Serial No. 4681

यदि हम कुरान की आयत 11 :5 के साथ इस हदीस को पढ़ें , तो साफ़ पता चलता है कि जब भी रसूल के साथी खुले आकाश के नीचे टट्टी करते थे ,या औरतों के साथ अय्याशी करते थे.अल्लाह देखता रहता होगा .और रसूल के साथी अल्लाह की नजर से बचने के लिए अपने सीने मोड़ कर खुद को छुपा लिया करते होंगे

बेशर्म सहाबी

“इब्ने अब्बास ने कहा कि जब मैंने यह आयत सुनी “लोग अपने सीनों को मोड़ लेते हैं ” तो रसूल से इस आयत मतलब पूछा . तब रसूल ने बताया कि हमारे साथियों को खुले आकाश के नीचे ,टट्टी पेशाब करने ,और खुलेआम सम्भोग करने की आदत है .और जब कोई उनको ऐसा करते हुए देख लेता है ,तो वह अपने सीनों को मोड़ लेते हैं . ताकि कोई उनको नहीं पहिचान सके .
“حَدَّثَنِى إِبْرَاهِيمُ بْنُ مُوسَى أَخْبَرَنَا هِشَامٌ عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ وَأَخْبَرَنِى مُحَمَّدُ بْنُ عَبَّادِ بْنِ جَعْفَرٍ أَنَّ ابْنَ عَبَّاسٍ قَرَأَ ( أَلاَ إِنَّهُمْ تَثْنَوْنِى صُدُورُهُمْ ) قُلْتُ يَا أَبَا الْعَبَّاسِ مَا تَثْنَوْنِى صُدُورُهُمْ قَالَ كَانَ الرَّجُلُ يُجَامِعُ امْرَأَتَهُ فَيَسْتَحِى أَوْ يَتَخَلَّى فَيَسْتَحِى فَنَزَلَتْ ( أَلاَ إِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ )
सही बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 204
Sahih Bukhari Hadith ArabicSerial No. 4682-

यही नहीं कुरान की आयत और इस हदीस से यह भी साबित होता है कि, रसूल के साथी निर्लज्ज ,असभ्य ,और अय्याश थे और उनकी औरतें भी ऐसी ही थी .और अल्लाह भी उनकी कामलीला देखने का शौक़ीन रहा होगा

निष्कर्ष

इस एक ही उदाहरण यह सिद्ध हो जाता है कि कुरान और हदीसों को धार्मिक किताब समझना बहुत बड़ी भूल होगी .क्योंकि इनमे सिर्फ ऊलजलूल बातों की भरमार है .इनको पढ़ने से न तो किसी का भला हुआ है ,और न होगा .सिर्फ अपराध ही बढ़ते जायेंगे .जैसा कि मुसलमान कर रहे हैं .यही कारण है कि मुसलमान बच्चों को कुरान रटाते रहते हैं , उसका अर्थ नहीं बताते .ताकि उनकी पोल नहीं खुल जाये .
इसलिए लोग अल्लाह ,रसूल , कुरान ,हदीस और इस्लाम से जितना ही दूर रहेंगे , विश्व में उतनी ही शांति रहेगी

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