साधारण सा दिखने वाला कुकरौंधा बवासीर से लेकर लीवर तक के रोगों में होता है कारगार

0

कुकरोंधा समस्त भारत में नमी प्रधान प्रदेशो में मिल जाता है. कुकरौंधा को कुकुरमुत्ता या कुकुंदर भी कहते हैं बंगाल में कुकुरशोंका या कुकसीमा कहते हैं. मराठी में कुकुरबंदा कहते हैं. इसके पौधे गलीज स्थानों और पुराने खंडहरों में अधिक होते हैं. इसका पौधा दो तीन हाथ लम्बा होता है. पत्ते तम्बाकू के समान लम्बे और गहरे रंग के होते हैं. शुरू शुरू में पत्ते मूली के पत्तों के समान होते हैं. पत्तों को मलने में बहुत बुरी बदबू निकलती है. पौधे पर लाल रंग की एक चोटी सी होती है. यह कड़वा, तीखा, पचने में मधुर, शीतल, ज्वर नाशक है. पारे के विकार और खून के दोष में दो तोले रस पीने और शरीर पर मलने से बड़ा उपकार होता है

कुकरोंधा के आयुर्वेदीय गुण कर्म एवम प्रभाव

कुकुंदर कटु, तिक्त, उषण, लघु, रूक्ष तथा कफशामक होता है.
कुकुंदर ज्वर, मुख रोग, रक्त दोष, शूल, दाह तथा तृष्णा नाशक होता है.
कुकुंदर की आद्र मूल मुख शोष नाशक होती है.
कुकुंदर का पंचांग तिक्त, स्तंभक, शोथघन, चक्षु क्षय, पाचक, क्रिमिघ्नी, कफ़निसारक, ज्वरअगन, तापशामक, मूत्रल, उत्तेजक तथा शीतादरोधी होता है.

कुकरोंधे के आयुर्वेदिक प्रयोग

खूनी तथा मस्से वाली बवासीर में कुकरोंधा के प्रयोग

1. कुकरोंधा के पत्तों को पीसकर अर्श के मस्सों में लगाने से अर्श में लाभ होता है.
2. दो ग्राम कुकरोंधा के पत्तों में समभाग काली मरीच तथा गेंदा के पत्ते मिलाकर पीसकर पानी में घोलकर पिलाने से अर्श में लाभ होता है.
3. खूनी बवासीर में कुकरोंधा के पत्तों का स्वरस 5 मिली में काली मरीच का चूर्ण 500 मि.ग्राम. (आधा ग्राम) मिलाकर सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है.
4. 5-10 मिली कुकरोंधा के पत्तों का स्वरस मिश्री में मिलाकर पिलाने से रक्तार्श में लाभ होता है.

त्वचा रोगों में कुकरोंधा के प्रयोग

1. त्वचा पर किसी प्रकार का संक्रमण होने पर इसके नए पत्तों से प्राप्त स्वरस में बराबर मात्रा में शहद मिलाकर संक्रमित स्थान पर लगाने से फायदा होता है.
2. ज़ख्म होने पर कुकरोंधा के पत्तों का स्वरस लगाने से ज़ख्म जल्दी भर जाता है. इसके पत्तों को पीसकर घावों पर लगाने से रक्त आना रुक जाता है और घाव जल्दी भरता है.
3. नाडी व्रण पर इसके पत्तों का रस लगाने से नाडी व्रण जल्दी ठीक हो जाता है.
4. फोड़े फुंसी होने पर कुकरोंधा के पत्तों का रस में श्वेत खदिर को पीसकर लगाने से फोड़े तथा फुंसियों का शमन होता है.
5. कुष्ठ रोगों में कुकरोंधा के पत्तों को बराबर मात्रा में मूली के बीज में मिलाकर पीसकर लगाने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है.

यकृत (लीवर) और प्लीहा रोगों में कुकरोंधा

कुकरोंधा के पंचांग (अर्थात सम्पूर्ण पौधा फल और फूल सहित) को पीसकर 250 मि.ग्राम. की गोलिया बनाकर प्रातः सानी 1-1 गोली को घृत कुमारी (एलो वेरा) के रस के साथ पीने से यकृत और प्लीहा के रोगों में फायदा होता है.

खांसी और कफ़ निकालने में कुकरोंधा के प्रयोग

खांसी में कुकरोंधे की जड़, मिश्री के साथ, मुंह में रखने से कंठ में जमा हुआ कफ निकलता है और मुंह का सूखना मिट जाता है.

बवासीर में कुकरोंधा के प्रयोग Bawasir me kukrondha

1 तोले रस में 6 माशे मिश्री मिला कर पीने से खूनी बवासीर जाती रहती है.

सूजाक में कुकरोंधा के प्रयोग (Soojak me kukrondha)

दो तोले कुकरोंधे के रस में ज़रा सी मिश्री मिला कर पीने से सूजाक नष्ट हो जाता है.

पलित रोग में कुकरोंधा

कुकरोंधा के एक भाग पतों का स्वरस में 4 भाग पानी मिलाकर क्वाथ बनाकर सर को धोने से पालित रोग में लाभ होता है.

नेत्र रोगों में कुकरोंधा

कुकरोंधा के पत्तों के स्वरस में फिटकरी को घिसकर अंजन करने से नेत्र जाला, नेत्र्फूली, आदि रोगों में लाभ होता है.

पेट के कीड़ों में कुकरोंधा

पेट में कीड़े होने पर इसके पत्तों का रस 5 मिली रोजाना पीने से पेट के कीड़े मरते हैं.

विसूचिका रोग में कुकरोंधा

1-2 ग्राम कुकरोंधा मूल चूर्ण में काली मरीच चूर्ण मिलाकर सेवन करने से विसूचिका में लाभ होता है.

अतिसार में कुकरोंधा

5-10 मिली कुकरोंधा के पत्तों का स्वरस में 1 ग्राम काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर खाने से अतिसार में लाभ होता है.

गृहणी में कुकरोंधा

गृहणी होने पर सुबह शाम इसके पत्तों का चूर्ण 2 ग्राम छाछ तक्र के साथ सेवन करने से फायदा होता है.

स्तन शोथ होने पर कुकरोंधा के प्रयोग

स्तन शोथ होने पर कुकरोंधा के पत्तों को पीसकर उसमे जौ का आटा मिलाकर गुनगुना करके लगाने से स्तन शोथ सही होता है.

संधिवात में कुकरोंधा

कुकरोंधा के पत्तों को पीसकर लेप करने से संधिवात का शमन होता है.

ज्वर में कुकरोंधा

कुकरोंधा के पत्तों के स्वरस की 2-2 बूंदो को कान में डालने से ठण्ड देकर आने वाला ज्वर सही होता है.

बच्चो के बिस्तर में पेशाब

5 मिली कुकरोंधा के पत्तों का स्वरस में 65 मि.ग्राम. कपूर मिलाकर पिलाने से बिस्तर में पेशाब करने की आदत दूर होती है.

Loading...

Leave a Reply