भारत की मीडिया व् बुद्धिजीवि “31 दिसंबर” पर शराब और पटाखों की मनाही नहीं करते जानिए क्यू

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आपने अक्सर देखा होगा की मीडिया व् वामपंथी बुद्धिजीवी

* होली पर पानी की बर्बादी का मुद्दा उठाते है, भारत में मरुस्थल जैसे हालात होने की दलील देते है
पानी फ्री होली का आवाहन करते है

* दीपावली पर पटाखों और शोर का मुद्दा उठाते है, प्रदुषण इत्यादि की बात करते है और, पटाखा फ्री दीपावली का            आवाहन करते है

स्वयं को मीडिया और बुद्धिजीवी कितना अच्छा घोषित करते है, इनको प्रदुषण की, पानी की, देश की कितनी फ़िक्र है, हालाँकि ऐसे तत्व बकरीद पर क़त्ल फ्री बकरीद की बात कभी नहीं करते अभी कुछ दिनों बाद 31 दिसम्बर आने वाला है, मॉडर्न सेक्युलरों का ये सबसे बड़ा त्यौहार बन चूका है सेक्युलर इस दिन खूब पटाखे फोड़ते है, दुनिया भर में फोड़े जाते है
सेक्युलर खूब दारु, पार्टी, करते है, पुलिस हज़ारों हज़ारों सेक्युलरो का चालान करती है वो भी हर शहर में

अब आइये आपको एक बात बताते है जो ये बुद्धिजीवी और मीडिया वाले नहीं बताते 31 दिसम्बर के दिन और रात अंदाजन 25 करोड़ लीटर शराब खरीदी जाती है, पि जाती है, पार्टी में बहाई जाती है, शराब के पूल में मुम्बई इत्यादि में तैराकी होती है

25 करोड़ लीटर शराब को बनाने में जितना पानी इस्तेमाल किया जाता है, वो इतना होता है जिस से महाराष्ट्र के विधर्भ के किसानों को 3 महीने तक का पानी मिल सकता है आपको बता दें की इतने शराब की कीमर 12 हज़ार करोड़ भारतीय रुपए के बराबर होती है

और शराब को अनेको भट्टियों, कारखानों में बनाया जाता है और शराब को बनाने में जितना प्रदुषण होता है वो 10 दीपावली के प्रदुषण के बराबर होता है साथ ही 31 दिसम्बर को पटाखों का प्रदुषण और जोड़ लीजिये

जैसे मीडिया और बुद्धिजीवी होली, दीपावली इत्यादि का विरोध करते है, पर 31 दिसम्बर की का विरोध इनके हैसियत में नहीं, भारत में मीडिया और बुद्धिजीवी केवल हिन्दुओ पर ही अपना बल दिखाते हैं बाकि स्वयं दोगले और भ्रष्ट होते है

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