केजरीवाल, मायावती जैसे दलित चिंतकों के मुंह में लकवे ने मार दिया है, दलितों अब तो आँखें खोलो

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मायावती, जय मिम-जय भीम वाले, अरविन्द केजरीवाल, वामपंथी, कांग्रेस और बाकि सब बुद्धिजीवि को स्वयं को बड़ा दलित प्रेमी और दलित चिंतक घोषित करते रहते है वो सब बुरी तरह बेनकाब हो चुके है
पश्चिम बंगाल में जिहादी मुस्लिमो द्वारा जितने भी दंगे हो रहे है उनमें सबसे अधिक पीड़ित समुदाय दलित ही है पर जितने भी ऐसे तत्व जो स्वयं को दलित प्रेमी बताते है वो सबके सब अपने मुँह पर लकवा मरवाये बैठे है
दलित समाज को अब आँखें खोलनी चाहिए जो मायावती, कांग्रेस, केजरीवाल जैसों के चक्करों में आती है वामपंथियों के चक्करों में आती है, जय मिम वालो के चक्करों में आती है
आपका बुरा वक़्त आएगा तो ये ऐसे ही मुँह मोड़ लेंगे न केजरीवाल आयेगा न मायावती  पीड़ित दलितों के लिए मदद तो दूर, ये तत्व 1 शब्द भी नहीं बोल रहे और न बोलेंगे ये दलित समुदाय को केवल वोट लेने के लिए यूज़ करते है और स्वयं सत्ता पा जाते है, दलित वहीँ रहता है

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