कानून सबके लिए बराबर है भारत में ये वाक्य केवल मजाक बन कर रह गया है

0
kanun-allindiapost

कानून सबके लिए बराबर है, ये बस फ़िल्मी डायलॉग है ! और ये बात खुद हमारी अदालतें ही सच साबित कर रही है, ये अदालतें सिर्फ आम लोगों पर ही फैसले सूना सकती है, हिन्दुओ त्यौहार मनाये न मनाये, गंगा में नहाये न नहाये ये अदालतें बस इन्ही पर एक्टिव है

अभी कुछ दिनों पहले तमिलनाडु में एक सरकारी कर्मचारी को अदालत ने 7 साल की सजा सुनाई है, क्यूंकि उसने 500 रुपए, जी हां 500 रुपए की रिश्वत ली, तो उसे 7 साल की सजा, कुछ दिनों पहले एक शख्स को अदालत ने 5 साल की सजा सुनाई है, क्यूंकि उसने 1 मोबाइल चुराया था

और पिछले ही दिनों हमारी इन्ही अदालतों ने झारखण्ड के एक पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा जिसने हज़ारों करोड़ का घोटाला किया, उसे मात्र 3 साल की सजा सुनाई, और उसकी सम्पत्तियों को जप्त तक नहीं किया, और अब तो हद ही हो गयी, सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के कारण ही 2G आवंटन को रद्द कर दिया था, पर निचली अदालत ने 1 लाख 76 हज़ार करोड़ के घोटलचियों को बरी कर दिया, यानि घोटाला तो 1 लाख 76 हज़ार करोड़ रुपए का हुआ पर वो घोटाला किसी ने भी नहीं किया

बिलकुल उसी तरह जैसे आरुषि का क़त्ल तो हुआ पर वो क़त्ल किसी ने नहीं किया, जेसिका लाल का क़त्ल तो हुआ पर वो क़त्ल किसी ने नहीं किया, हिरन का क़त्ल तो किया गया पर वो क़त्ल सलमान खान ने नहीं किया, फुटपाथ पर सो रहे लोगों पर गाड़ी तो चढ़ी पर वो गाड़ी किसी ने नहीं चढ़ाई, और अब 1 लाख 76 हज़ार करोड़ का घोटाला तो हुआ पर वो घोटाला किसी ने नहीं किया

इसके अलावा आदर्श घोटाले में भी आज मुंबई हाई कोर्ट ने कोंग्रेसी नेता अशोक चव्हाण को राहत दे दी है, अब आने वाले दिनों में कुछ संभावित फैसले ये होंगे – लालू ने चारा नहीं खाया, राहुल-सोनिया ने भ्रष्टाचार नहीं किया, कोयला घोटाला कभी हुआ ही नहीं, कामनवेल्थ घोटाला कभी हुआ ही नहीं, भ्रष्टाचारी अदालतों के अंदर मौजूद है, और वो करोडो रुपए बना रहे है, साथ ही जनता के टैक्स से भारी तनख्वाह भी उठा रहे है, मजाक बनाकर रख दिया गया है

Loading...

Leave a Reply