नेता लोग AC कमरे में बैठ कर भाषण देते है, आधे पेट खाकर जवान करते है सीमा की सुरक्षा

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क्या देश के सरहदों की रखवाली करने वाले हमारे देश के सैनिकों को घटिया खाना परोसा जा रहा है. क्या उन्हे पेटभर खाना भी नहीं मिल रहा है. ये सवाल हम नहीं बल्कि देश की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसी, कैग ने खड़े किए हैं | सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि पाकिस्तान और चीन की सीमा पर तैनात जवानों को ना तो ताजा खाना मिलता है और ना ही खाना जरुरत के हिसाब से मिलता है.

इस रिपोर्ट को मौजूदा संसद के मानसून सत्र में पेश किया गया है. रिपोर्ट में सेना के महकमों के बीच में आपसी सामंजस्य की कमी और रक्षा मंत्रालय की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े किए गए हैं | देश की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसी, सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि हमारे देश के सैनिकों को घटिया खाना परोसा जाता है. सीएजी के मुताबिक, सेना द्वारा खुद कराए गए सर्वे में इस बात का खुलासा हुआ है कि 68 प्रतिशत जवान उनकों परोसे जा रहे खाने को संतोषजनक या फिर निम्न-स्तर का मानते हैं |

सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि सैनिकों को निम्न-गुणवता का मांस और सब्जी खाने को दी जाती है. इसके अलावा, राशन की मात्रा भी कम दी जाती है और जो राशन दिया जाता है वो स्वाद अनुसार भी नहीं होता है | सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक, राशन की कमी और गुणवत्ता की सबसे ज्यादा कमी उत्तरी और पूर्वी कमांड में पाई गई है. उत्तरी कमांड की जिम्मेदारी पूरे जम्मू-कश्मीर और

करगिल से सटी पाकिस्तानी सीमा और लद्दाख से सटी चीन सीमा की रखवाली करना है. जबकि पूर्वी कमांड की जिम्मेदारी अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम से सटी चीन सीमा की रखवाली करना है |

कैग रिपोर्ट के मुताबिक, सेना मुख्यालय द्वारा तैयार किए गए राशन-एस्टीमेट को रक्षा मंत्रालय ने 20-23 प्रतिशत तक कम कर दिया. जबकि सेना ने ये राशन फिल्ड-एरिया में तैनात बटालियन और रेजीमेंट्स की वास्तविक खाद खाद्य क्षमता और उपलब्ध स्टॉक के आधार पर तैयार किया था. यही नहीं सेना के कमांड मुख्यालय और डायेरक्टर जनरल ऑफ सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट यानि डीजीएसटी के आंकडों में भी काफी अंतर पाया गया. जिसके चलते सैनिकों के राशन में घालमेंल दिखाई दिया |

रिपोर्ट में उदाहरण के तौर पर कहा गया है कि जहां कमांड मुख्यालयों ने 2013-14 में मात्र 3199 मैट्रिक टन चाय की पत्ती की मांग की थी, डीजीएसटी ने उस मांग को खुद बे खुद बढ़ाकर 2500 मैट्रिक टन कर दिया. वहीं, कमांड्स ने जब 2014-15 में करीब 46 हजार मैट्रिक टन (45,752) दाल की मांग की थी, तो डीजीएसटी ने उसे घटाकर 37 हजार मैट्रिक टन कर दिया |

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