बड़े इस्लामीक धर्मगुरु ने स्वीकारा, “अल्लाह के लिए काफिरो का खात्मा जरुरी”

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इस शख्स का विडियो और ये क्या बोल रहा है ये आप सुन देख और समझ सकते है।

और ये कोई आम मुस्लिम नहीं, कोई सिरफिरा या पागल नहीं बल्कि मिस्र का बड़ा इस्लामिक धर्मगुरु है, शेख मोर्गन सालेम।

भारत में वामपंथी इतिहासकार मुस्लिम आक्रांताओं की खूब तारीफ करते है, गज़नी, गौरी को महान बताते है, अकबर, शाहजहां को भारत का निर्माता बताते है।

जबकि सच्चाई ये है की अफगानिस्तान में सबसे पहले अरब के मुस्लिम हमलावरों ने हमला किया वहां बौद्ध और हिन्दू समाज को ख़त्म किया।

मंदिर तोड़े, मूर्तियां तोड़ी, फिर धीरे धीरे ये आज के पाकिस्तान तक पहुचे फिर कत्लेआम करते हुए, हिन्दुओ, बौद्धों का धर्मान्तरण करते हुए दिल्ली, बंगाल और आगे असम तक पहुचे।

साथ ही ये जिहादी तत्व दक्षिण में भी पहुचे, जहाँ मैसूर, बीजापुर नाम के इस्लामी सल्तनत बनाये। इन लोगों ने 8 करोड़ से भी अधिक हिन्दुओ और बौद्धों को क़त्ल किया।

और ये सबकुछ स्वयं अरब का ये बड़ा इस्लामिक धर्मगुरु भी स्वीकार कर रहा है, इसका कहना है की, मूर्तिपूजको को ख़त्म करना मुहम्मद तथा अल्लाह का कानून है और ये जरुरी है।

वैसे आपको बता दें की स्वयं सऊदी अरब में भी मूर्तिपूजा होती थी, यहाँ तक की मक्का में 360 मूर्तियां थी मुहम्मद और उसके साथियों ने मदीना पर कब्जा करने के बाद मक्का पर हमला किया था तथा 360 में से 359 मूर्तियां तोड़ दी थी,

केवल एक शिवलिंग जैसी मूर्ति बची जिसे आज काबा के अंदर देखा जा सकता है। इतिहास की ये सच्चाइयां भारत के सेक्युलर तथा वामपंथी इतिहासकार आपको कभी नहीं बताते।

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