संसार की इस जगह पर रहने के लिए घर जमीन के ऊपर नहीं, बल्कि जमीन के नीचे बने हुए हैं

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संसार में एक से बढ़ कर एक नायाब जगहों पर इंसानी बस्तियां बसी हुई हैं. ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों से लेकर सुदूर जंगली इलाकों में इंसान ने जीवन के लिए राह निकाल डाली है. ऑस्ट्रेलिया के दुर्गम शुष्क रेगिस्तान में भी एक ऐसी ही इंसानी बस्ती बसी हुई है, जहां सामान्य सोच के अनुसार रहना अपने आप में किसी रोमांच से कम नहीं होगा. दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया का Coober Pedy कस्बा पूरी तरह से जमीन के अंदर बसा हुआ है. क्यों, है ना ये चौंकाने वाली बात

Coober Pedy दुनिया की उन गिनी-चुनी इंसानी बस्तियों में से एक है, जो बाकी दुनिया के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं है. यहां के हज़ारों बाशिंदे रेगिस्तान के बीच मौजूद एक बड़े से होल से इस अंडरग्राउंड शहर में प्रवेश करते हैं

इस अंडरग्राउंड शहर में संसार के बाकी अन्य सभ्य शहरों की तरह सारी सुविधाएं मौजूद हैं. यही नहीं पाताल में बसे इस शहर में ईश्वर की इबादत के लिए एक चर्च भी बनाया गया है

आज के ग्लोबलाइजेशन के जमाने में इस छोटे से शहर को अगर एक ग्लोबल विलेज कहा जाये, तो कुछ भी गलत नहीं होगा. इस छोटे से शहर में 45 अलग-अलग देशों की राष्ट्रीयता वाले लगभग 3,500 लोग रहते हैं. इस क्षेत्र की स्थापना 1915 में Opal (दुधिया पत्थर) की खुदाई के लिए की गई थी.

अब यहां जमीन के नीचे जिन खदानों से पत्थर निकाला जा चुका है, वहां इंसान ने जा कर रहना शुरू कर दिया है. जमीन की ऊपरी वीरान और निर्जन सतह को देख कर कोई भी अंदाज़ा नहीं लगा सकता कि जमीन से थोड़ी ही गहराई पर एक सुंदर सी दुनिया बसी हुई है

यह शहर सतत विकास का एक शानदार उदाहरण पेश करता है. जमीन की गोद में बसे इस क्षेत्र में एक से बढ़ कर एक शानदार रेस्टोरेंट, होटल्स मौजूद हैं. यहां मौजूद कमरों में सुंदर-सुंदर पेंटिंग्स लगी हुई हैं. इस पूरे क्षेत्र में साल भर तापमान को 23-25 डिग्री के मध्य मेंटेन करके रखा जाता है. इस क्षेत्र को ‘Opal Capital of the World’ भी कहा जाता है.

यहां स्थित कुछ घर तो किसी कोठी से कम नहीं है, इनका आकार 450 स्क्वायर मीटर तक फ़ैला हुआ है. जिनके अंदर एशो-आराम के सभी साधन मौजूद हैं.

यहां एक 4 स्टार होटल भी है, जो अपनी तरह की ख़ास केटेगरी में वर्ल्ड का एकमात्र होटल है. यहां दुनियाभर से लोग जमीन के नीचे रहने का शानदार एक्सपीरियंस लेने आते हैं.

बचपन में सुना था, जीवन अपने लिए रास्ता तलाश ही लेता है. Coober Pedy इस लोकोक्ति को सही मायनों में चरितार्थ करता हुआ नज़र आता है

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