अब भारत, इजराइल, रूस और अमेरिका साथ मिलकर खत्म करेंगे इस्लामी आतंकवाद को

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दुनिया भर में लोग कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ अब एकजुट हो रहे है, ऐसा कहना अब अतिशयोक्ति नहीं है, डोनाल्ड ट्रम्प के जीत के बाद दुनिया को इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ एक “डेडली कॉम्बिनेशन’ मिल गया है
ये विश्लेषण बहुत ही दिलचस्ब है जिसमे हम कुछ पहलुओं के बारे में आपको बता रहे है

* सबसे पहले रूस – व्लादिमीर पुतिन सीरिया में इस्लामिक आतंक से लड़ रहे है, अलेप्पो में रुसी सेना ने हेलीकॉप्टर और ड्रोन से पर्चियां गिरा दी हैं की जो लोग आतंकी नहीं है वो
इलाका छोड़ दें, क्योंकि जल्द ही बमबारी से यहाँ सबकुछ जमींदोज कर दिया जायेगा, इस्लामिक आतंकवाद पर पुतिन कोई समझौता करने के मूड में नहीं दीखते

* दूसरे नंबर पर बात करते है इजराइल की – प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कह चुके हैं की वो ईरान को परमाणु बम नहीं बनाने देंगे, और सब्र का इम्तिहान लिया गया तो अरब देश भी जापान की तरह  एक परमाणु हमला देखेंगे (इजराइल परमाणु युक्त देश है) वैसे भी इजराइल का मुस्लिम देशों से पुराने ज़माने से 36 का आंकड़ा है

* अब बात करते है भारत की – प्रधानमंत्री मोदी भले ही सेकुलरिज्म में दिख रहे हो, परंतु ये केवल एक दिखावा ही है, जिस तरह आतंकी ज़ाकिर नाइक हो, कश्मीरी अलगगवादी हो, पाकिस्तान हो प्रधानमंत्री मोदी इस्लामिक आतंकवाद और कट्टरपंथियों के खिलाफ सख्त दिखने लगे है, जाहिर सी बात है प्रधानमंत्री मोदी अभी दूसरे गेयर में चल रहे है, जल्द चौथा और पांचवा गेयर जरूर लगाएंगे

* और अब अमरीका में आ गए डोनाल्ड टर्म – इनका मुस्लिम आतंकियों और कट्टरपंथियों के बारे में क्या विचार है ये तो अब कोई पूछने की बात नहीं है  ट्रम्प कह चुके है की वो केवल अमरीका में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ जंग छेड़ेंगे, ट्रम्प के तो नाम मात्र से दुनिया के कट्टरपंथियों में भय देखने को मिल जाता है, ट्रम्प तो पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर भी नियंत्रण की बात कह चुके है

“और सबसे महत्वपूर्ण चीज ये है की, पुतिन मोदी नेतन्याहू और ट्रम्प” इन चारों में ही एक रिश्ता है  ये चारो ही नेता एक दूसरे को पसंद करते है, इनकी विचारधारा लगभग एक जैसी है और चारो ही नेता राष्ट्रवादी हैं, इन चारों में आपसी तालमेल होना बहुत ही आसान है”

वहीँ यूरोप में पहले ब्रिटैन के लोगों ने सेकुलरिज्म को नकार कर यूरोपियन यूनियन से अपने को अलग कर लिया, अब नीदरलैंड में ये अगले साल मार्च में होने वाला है  फ्रांस, और जर्मनी में भी लोग सेकुलरिज्म को नकार रहे है और इस्लामिक आतंक के खिलाफ एकजुट हो रहे है”

इन सभी घटनाक्रम पर आप एक साथ नजर डालें तो आपको दुनिया भर में इस्लामिक आतंकवाद और इस्लामिक आतंकियों की मौत नजर आएगी  कहना आसान है की आतंकवाद के खिलाडी एक “डेडली कॉम्बिनेशन” तैयार हो चूका है और अब कदाचित पूरी दुनिया इस्लामिक आतंकवाद के खात्मे को एन्जॉय करेगी

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