इलाहाबाद : एक ‘खास धर्म’ को नहीं पसंद राष्ट्रगान, स्कूल में किया बैन, लगा ताला

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15 अगस्त आने वाला है। देश में देशभक्ति की लहर चल रही है। स्कूलों में 15 अगस्त के मौके पर खास कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। राष्ट्रगान गाया जाता है। आजादी के वीर नायकों की कहानियां सुनाई जाती हैं। लेकिन इस माहौल में भी इलाहाबाद में एक स्कूल है जहां राष्ट्रगान नहीं गाया जाएगा। इतना ही नहीं, इस स्कूल में पिछले 12 सालों से राष्ट्रगान नहीं गाया गया है।

आजाद भारत की इस से बड़ी विडंबना क्या होगी कि इलाहाबाद एक स्कूल में बच्चे राष्ट्रगान नहीं गा रहे हैं। एम ए कान्वेंट नाम का ये स्कूल सुर्खियों में है। इसका कारण है कि यहां के प्रिंसिपल समेत 8 शिक्षकों ने इसी बात पर इस्तीफा दे दिया है। जिसके बाद से बवाल खड़ा हो गया है। इस्तीफा देने वाले शिक्षकों का कहना है कि राष्ट्रगान उन्हें संविधान से दिया गया मूल अधिकार है लेकिन स्कूल प्रबंधन ने जब उन्हें इसे गाने पर आपत्ति जाहिर की तो उन्होंने स्कूल छोड़ दिया।

वहीं स्कूल के मैनेजर जियाउल हक का कहना है कि उन्हे राष्ट्रगान में भारत भाग्य विधाता शब्द से आपत्ति है। जब तक इसे हटाया नहीं जाता तब तक वो स्कूल में राष्ट्रगान नहीं गाने दे सकते हैं। इनका कहना है कि इस्लाम के मुताबिक सभी का विधाता ईश्वर है। तो भारत का भी विधाता वही होगा। भारत कैसे किसी का विधाता बन सकता है। जियाउल हक का कहना है कि अल्लाह के अलावा किसी किसी और को विधाता कहेंगे तो हम मुसलमान नहीं रहेंगे।

मामला गरमाया तो इलाहाबाद प्रशासन के कानों तक खबर पहुंची। प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को नोटिस भेजा। और उसके बाद स्कूल पर ताला लगा दिया। जिन टीचरों नें स्कूल से इस्तीफा दिया है वो देशभक्ति को धर्म से जोड़कर देखने के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि पिछले 12 सालों से इस स्कूल में राष्ट्रगान नहीं गाया गया है। लंबे समय से इस तुगलकी फरमान के साए में स्कूल चल रहा है। किसी ने विरोध नहीं किया। बच्चों को नेशनल एंथम के बारे में पता ही नहीं है। बच्चों के अभिभावकों को भी खामोश करा दिया जाता है।

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