मौलाना शिक्षा मंत्री बना तो भाईचारा मजबूत, पर जब एक महंत CM बना तो संप्रदायिकता

0

मशहूर लेखक और इस्लामिक विद्वान तारिक फतह ने भारत के सेक्युलर तत्वों को आड़े हाथों लिया है, और जमकर लताड़ लगायी है, यहाँ मुख्य चीज ये है की सेक्युलर तत्वों के उल्ट तारिक फतह की बात में भारी तर्क भी है

हुआ ये है की, बहुत से सेक्युलर तत्व, खासकर मीडिया और इस से जुड़े बुद्धिजीवी लगातार बीजेपी की आलोचना कर रहे है की, एक महंत को मुख्यमंत्री कैसे बनाया जा सकता है क्योंकि भारत एक सेक्युलर देश है, ऐसे में एक मंदिर का महंत मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए

ये सेक्युलर तत्व लगातार योगी आदित्यनाथ का विरोध कर रहे है, अब तारिक फतह ने बेहद तर्कपूर्ण अंदाज में इन सेक्युलर तत्वों की हजामत बनाई है तारिक फतह ने कहा की, एक मंदिर का महंत मुख्यमंत्री बना है, तो कानून के हिसाब से ही बना है भारत के संविधान में कहाँ लिखा है की, एक महंत चुनाव नहीं लड़ सकता, विधायक, सांसद नहीं बन सकता, योगी आदित्यनाथ तो इसी सेक्युलर संविधान के अंतर्गत बने कानून से मुख्यमंत्री बने है वो स्वयं गद्दी पर जबरन थोड़ी बैठ गए है
आगे तारिक फतह ने कहा की, इसी भारत में एक मौलाना को भारत का सबसे पहला शिक्षा मंत्री (मौलाना आज़ाद) बनाया गया था, तब यही लोग बहुत खुश थे, और कहा करते थे की इस से भाईचारा मजबूत होगा

एक मौलाना मंत्री बने तो भाईचारा मजबूत होता है, पर एक महंत मुख्यमंत्री बने तो साम्प्रदायिकता हो जाती है तारिक फतह ने कहा की, योगी आदित्यनाथ का केवल इसलिए विरोध किया जा रहा है क्योंकि वो हिन्दू धर्म से सम्बन्ध रखते है, अगर कोई मौलाना जम्मू कश्मीर में मुख्यमंत्री बनेगा तो सेक्युलर तत्वों में से कोई विरोध नहीं करेगा मौलाना से प्यार पर महंत से नफरत, भारत में बहुत ही स्पेशल तरह का सेकुलरिज्म चल रहा है

Loading...

Leave a Reply