कांग्रेस के पापों की कीमत चूका रहा है पूरा भारत, मोदी पर आरोप लगाने से पहले जान लें सच्चाई

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पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से मोदी सरकार निशाने पर है. एक तरफ कच्चे तेल की कीमत कम हो रही है और दूसरी तरफ पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ते जा रहे है. लेकिन आप लोगों को ये समझना बहुत जरुरी है कि आखिर पेट्रोल के दाम क्यूँ बढ़ रहे है.

आपको बता दे कि भारत अपना 80 पर्सेंट क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है. पेट्रोल और तेल के दाम अंतरराष्ट्रीय तेल के दामों से सीधे आनुपातिक है. जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय तेल और लोकल तेल के दामों में सह-सम्बन्ध है. भारत में पेट्रोलियम प्रॉडक्ट की कीमत इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के रेट के हिसाब से तय होती है । अब सवाल ये उठता है कि जब अंतर्राष्ट्रीय तेल के दाम घटते है तो लोकल तेल के भी घटने चाहिए ।

लेकिन ऐसा नहीं होता, क्यूंकि भारत में तेल की कीमतों में टैक्स जुड़ जाता है जिसके कारण कीमत नहीं घटती. ईरान से भारत लगभग 5 लाख बैरल प्रतिदिन तेल लेता हैं. उसका भारत पर करीब 6.50 बिलियन डॉलर यानि करीब 43 हजार करोड़ का उधार हो गया है.

पेट्रोल के दाम बढ़ने का एक कारण भारत के ऊपर ईरान का कर्ज भी है. उधार आज का नहीं बल्कि कोंग्रेस की सरकार के समय 4 साल पहले का है । भारत ईरान से कच्चा तेल लेने वाले सबसे बड़े ग्राहकों में से एक है.

ईरान पर प्रतिबंध लगने के दौरान भी भारत ने तेल का आयात बंद नहीं किया था. ईरान चाहता था चार साल पहले का कर्ज का भुगतान आज के यूरो के दाम के हिसाब से हों । लेकिन ख़ुशी की बात ये है कि मोदीजी ने पुराने तेल के एवज में जो उधार हुआ था उसका भुगतान ईरान को कर दिया है ।

पेट्रोल के दामों के बढ़ने के पीछे एक कारण यह भी है कि मोदी सरकार फिस्कल डेफिसिट काबू में करना चाहती है । मोदी सरकार अपनी आय का पूर्ण इस्तमाल भारत की अर्थव्यवस्था को सुधारने में कर रही है.

अगर पेट्रोल के दाम कम कर दिए जाते है तो यह सुधार संभव नहीं हो पायेगा । भारत में अच्छी सड़के, स्कूल, अस्पताल का निर्माण हो यही मोदी सरकार का सपना है । मोदी सरकार केवल वादे नहीं करना चाहती वो काम करती है आपको पता ही है पहले हम लगभग सभी रक्षा उपकरण बाहर से लेते थे लेकिन अब बाहर बेचने भी लगे हैं ।

हमारी बर्मोस मिसाइल की सारी दुनिया दीवानी हो गयी है । पहले भी लोग तेल की क़ीमतें अदा कर ही रहे थे लेकिन ऐसा नहीं है कि ये हमेशा यूँ ही चलता रहेगा । देश की अर्थवावस्था में सुधार आने पर तेल की क़ीमतें बेहद तेज़ी से घटा दी जाएँगी । एक और बात ध्यान रहे कि मोदी सरकार एनर्जी के विकल्प के रूप में सोलर पर बहुत ध्यान दे रही है और उसकी क़ीमतों में काफ़ी कमी आयी है ।

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