कांग्रेस चाहती है सेना में भी सांप्रदायिक हो जबकि अपने समय में कांग्रेस ने सेना को भी लूटने से नही छोड़ा

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कांग्रेस अपनी घृणित राजनीती से कभी बाज नहीं आती और एक बार फिर कांग्रेस ने अपनी घृणा भरी सांप्रदायिक सोच का परिचय दिया है

दरअसल हुआ ये की, युद्ध में अधिक एक्सपीरियंस रखने वाले बिपिन रावत को नरेन्द्र मोदी सरकार ने थलसेना प्रमुख नियुक्त किया है वैसे भी पाकिस्तान और चीन से हमारे संबंध अभी गरम है, युद्ध के माहौल है

खैर, बिपिन रावत की नियुक्ति पर भी कांग्रेस ने सवाल उठा दिए और कांग्रेस ने सेना को भी अपनी घृणित राजनीती का शिकार बना दिया कांग्रेस का कहना है की, नरेन्द्र मोदी ने बिपिन रावत को सेना प्रमुख बनाया जबकि मोहम्मद हरिज़ को नहीं, मोदी ने एक मुस्लमान को थलसेना प्रमुख नहीं बनने दिया

वैसे कांग्रेस को ये बताना चाहिए की, वो स्वयं कितने मुसलमानो को भारतीय थलसेना का प्रमुख बना चुकी है आपको बता दें की भारत में 55 सालों से अधिक समय तक कांग्रेसी प्रधानमंत्री ही रहा इंदिरा रही, नेहरू रहा, राजीव गाँधी, मनमोहन सिंह, नरसिम्हा राव इत्यादि 55 साल में कांग्रेस ने कितने मुसलमानो को सेना प्रमुख बनाया, इसका जवाब है 1 भी नहीं

और आपको ध्यान दिलाना चाहेंगे की, वाजपेयी सरकार ने अब्दुल कलाम को भारत का राष्ट्रपति बनाया था 2007 में अब्दुल कलाम एक बार फिर राष्ट्रपति बनना चाहते थे पर सोनिया गाँधी व् मनमोहन सिंह ने अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति नहीं बनने दिया और इंदिरा की रसौई में काम करने वाली प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति बनाया

अब्दुल कलाम तो बीजेपी के नहीं थे, न ही वो किसी राजनितिक दल के थे, देश के महान वैज्ञानिक थे पर कांग्रेस ने मुसलमान को राष्ट्रपति नहीं बनने दिया

और आज ये घृणित कांग्रेस सवाल करती है की, मोदी ने मुस्लिम को सेना प्रमुख नहीं बनने दिया जबकि 55 साल में स्वयं कांग्रेस ने किसी मुस्लिम को सेना प्रमुख नहीं बनाया ये वही कांग्रेस है जो सत्ता जल्दी पाने के चक्कर में देश के टुकड़े टुकड़े तक कर चुकी है, इस कांग्रेस से अधिक दोषी वो लोग है जो इसे वोट देते है

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