कोलेस्ट्रॉल की वजह से होने वाले हार्ट अटैक और हाई बीपी जैसे रोगों से बचने का अचूक तरीका

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बढ़ा हुआ बैड कोलेस्ट्रॉल हृदय रोगों को बुलावा देता है, ये धमनियों में एकत्र होने लगता है, और इसका मार्ग संकरा कर देता है, तंग धमनियों से उच्च रक्तचाप कि शिकायत हो जाती है, इनसे रक्त के धक्के (ब्लड क्लोटिंग) होने से दिल का दौरा पड़ने कि सम्भावना बढ़ जाती है, जो मृत्यु का कारण भी बन सकती है। इसके लिए आपको जानना चाहिए के इस रोग से बचने के लिए क्या खाए और क्या ना खाएं।

तेल

तेलों का सही बैलेंस जरूरी है। एक दिन में कुल तीन चम्मच तेल काफी है। तेल बदल-बदल कर और कॉम्बिनेशन में खाएं, मसलन सरसों, मूंगफली, नारियल, ऑलिव ऑइल और तिल का तेल बदल बदल कर इस्तेमाल करना चाहिए। रिफाइंड तेल बिलकुल भी इस्तेमाल नहीं करने चाहिए। कॉम्बिनेशन और बदल-बदल कर तेल खाने से शरीर को सभी जरूरी फैट्स मिल जाते हैं।

आंवला

आंवला बैड कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों में बहुत ही ज्यादा उपयोगी है, नियमित कम से कम 2 आंवलो का सेवन करें।

चुकंदर

चुकंदर भी बैड कोलेस्ट्रॉल के लिए बहुत उपयोगी है, इसका भी नियमित इस्तेमाल करना चाहिए।

अर्जुन कि छाल

दवाओ में अर्जुन कि छाल का काढ़ा नियमित इस्तेमाल करें, चाहे आप अर्जुन का काढ़ा बनाये या फिर इसकी छाल को चाय कि तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं, इस चाय में चायपत्ती नहीं मिलानी, बाकी वैसे ही चाय बनाये, इस दवा को और कारगर बनाने के लिए आप इसमें चुटकी भर दालचीनी भी मिला कर काढ़ा या चाय बनाये।

किशमिश या मुनक्का

50 ग्राम काले चने, 10 किशमिश या मुनक्का और दो बादाम रात को भिगो दें, सुबह खाली पेट इन्हें चबा चबा कर खा लें और यही पानी पी लें। इससे असामान्य रक्तचाप सामान्य हो जाता है तथा कोलेस्ट्रॉल भी सामान्य होकर हृदय शक्तिशाली हो जायेगा। यह प्रयोग लम्बे समय तक करते रहें, मधुमेह के रोगी ४ किशमिश ही लें।

फाइबर युक्त

ऐसी चीजें खाएं जिनमें फाइबर खूब हो, जैसे कि गेहूं, ज्वार, बाजरा, जई (जौ) आदि। दलिया, स्प्राउट्स, ओट्स और दालों के फाइबर से कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। आटे में चोकर मिलाकर इस्तेमाल करें।

हरी सब्जियां

हरी सब्जियां, साग, शलजम, बीन्स, मटर, ओट्स, सनफ्लावर सीड्स, अलसी आदि खाएं। इनसे फॉलिक एसिड होता है, जो कॉलेस्ट्रॉल लेवल को मेंटेन करने में मदद करता है।

अलसी, बादाम, बीन्स और सरसों तेल में काफी ओमेगा-थ्री होता है , जो दिल के लिए अच्छा है। अलसी के तेल को पकाना नहीं चाहिए।

मेथी , लहसुन , प्याज , हल्दी , बादाम , सोयाबीन आदि खाएं। इनसे कॉलेस्ट्रॉल कम होता है। एक चम्मच मेथी के दानों को पानी में भिगो लें। सुबह उस पानी को पी लें। मेथी के बीजों को स्प्राउट्स में मिला लें, उसमें फाइबर होता है।

एचडीएल यानी गुड कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाने के लिए रोजाना पांच-छह बादाम खाएं। इसके अलावा ओमेगा थ्री वाली चीजें अखरोट, फ्लैक्स सीड्स (अलसी के बीज) खाने चाहिए।

कॉलेस्ट्रॉल लिवर के डिस्ऑर्डर से बढ़ता है। लिवर को डिटॉक्सिफाइ करने के लिए अलोवेरा जूस, आंवला जूस और वेजिटेबल जूस लें। इन तीनों को मिलाकर रोजाना एक गिलास जूस लें। कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा है तो दिन में दो गिलास भी पी सकते हैं। नारियल पानी पीएं। शहद ले सकते हैं क्योंकि इससे इम्युनिटी बढ़ती है।

बैड कोलेस्ट्रॉल में क्या करें

तला-भुना खाना न खाएं। भाप में पकाकर खाना खाएं। देसी घी, डालडा, मियोनिज, बटर न लेंबिस्किट, कुकीज, मट्ठी मैदे की चीजों आदि में काफी ट्रांसफैट होता है, जो सीधा लिवर पर असर करता है। उससे बचें। प्रोसेस्ड और जंक फूड से बचें। पेस्ट्री, केक, आइसक्रीम, मीट भुजिया आदि से भी परहेज करें। फुल क्रीम दूध और उससे बना पनीर या खोया न खाएं। उड़द दाल, नमक, और चावल ज्यादा न खाएं। कॉफी भी ज्यादा न पिएं।

नोट :

खूब एक्सरसाइज करें, क्योंकि सिर्फ खाने से बहुत फायदा नहीं होता। दवाओं खासकर पेन किलर दवाओं और स्टेरॉइड क्रीम इंजेक्शन का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करें, क्योंकि इनका लिवर पर सीधा बुरा असर हो सकता है और शरीर में पानी भी रुक सकता है। स्टेरॉइड हॉर्मोंस होते हैं और इनका इस्तेमाल इनफर्टिलिटी, सर्जरी, साइनस आदि में परेशानी बढ़ने पर होता है। शराब या सिगरेट पीने से बचें। लिवर और कॉलेस्ट्रॉल के बीच सीधा संबंध है। लिवर को ठीक रखना जरूरी है क्योंकि लिवर ठीक है तो कॉलेस्ट्रॉल बढ़ेगा ही नहीं। दूसरी ओर , कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा है तो फैटी लिवर हो सकता है।

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