मोदी का दबाव और कूटनीतिक चाल : चीन भी भारत के पक्ष में बोला खुले हैं NSG में एंट्री के रास्ते

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भारत और चीन के रिश्तों में हाल के दिनों में कड़वाहट देखी गई है NSG के मुद्दे पर जिस तरह से चीन ने भारत को धोखा दिया था. वो अभी तक हिंदुस्तान भूल नहीं पाया है। हालांकि भारत ने एमटीसीआर की सदस्यता हासिल करके चीन से मिले दर्द को कुछ कम जरूर किया है। अब साउथ चाइना सी पर हो रहे विवाद के कारण चीन घिरा हुआ है। ऐसे में उसे भारत की याद आ रही है।

चीनी विदेश मंत्री के भारत दौरे से पहलेचीन के सरकारी मीडिया ने हिंदुस्तान को पटाने की कोशिश करते हुए खबर छापी है। अखबार में लिखा है कि NSG में शामिल होने के लिए भारत के दरवाजे अभी बंद नहीं हुए हैं। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने लिखा है कि दोनों देशों को आपस में साजीदार बनना है, ना कि दुश्मन। बीजिंग और दिल्ली कई मुद्दों पर कूटनीतिक बैठक करके आपसी साझेदारी का भविष्य तय करते हैं।

चीनी सरकारी मीडिया को सरकार का मुखपत्र माना जाता है। जाहिर है कि चीनी सरकार वैश्विक स्तर पर भारत की अहमियत को पहचान रही है। खबर में लिखा है कि भारत ने चीन पर एनएसजी सदस्यता रोकने का गलत आरोप लगाया है। दरअसल चीन इस नियम पर अड़ा हुआ था कि एनपीटी पर साइन करने वाले देशों को ही इस ग्रुप में जगह मिलनी चाहिए। अब सरकार का बचान करते हुए एजेंसी ने लिखा है कि ये कोई परंपरा नहीं है कि एनपीटी पर साइन करने वालों को ही NSG का सदस्य बनाया जाए।

चीन की भारत को पटाने की सारी कोशिश साउथ चाइना सी को लेकर हो रहे विवाद के कारण हैं। चीन उस पर अपना अधिकार बता रहा है। जबकि अंतररार्ष्ट्रीय कोर्ट से भी उसे झटका लग चुका है। वो अपनी ताकत का इस्तेमाल करके साउथ चीन सागर पर कब्जा करना चाह रहा है। लेकिन साथ ही वो दुनिया के बड़े देशों का समर्थन भी चाह रहा है। वो चाहता है कि भारत दक्षिण चीन सागर पर उसकी उलझनों को समझे।

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