भारत-अमेरिका एक साथ चलाएंगे ‘गोली’, पाकिस्तान औरचीन के छूट रहे हैं पसीने

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दिल्ली में मोदी सरकार के आने के बाद से देश की ताकत में लगातार इजाफा हो रहा है,अमेरिका के साथ कूटनीतिक, रणनीतिक, व्यापारिक और सैन्य संबंध नए दौर में पहुंचे हैं, इसी का नतीजा है कि अमेरिका और भारत की सेनाएं आज ज्यादा से ज्यादा आपसी सहयोग के साथ चल रही हैं। हाल में भारत और अमेरिका के बीच जो सैन्य समझौता हुआ है उसका फायदा दोनों ही देशों को मिलेगा, इससे हम पर बुरी नजर रखने वाले पड़ोसी परेशान हो उठे हैं। ये भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य रिश्तों का ही असर है कि पाकिस्तान ने बीते दिनों अपने चहेते देश चीन के साथ सैन्य समझौते पर बातचीत की पहल को मंजूरी दी। भारत-अमेरिका के संबंधों से चीन भी कम परेशान नहीं है।

बहरहाल ‘दुश्मनों’ की परवाह नहीं करते हुए भारत और अमेरिका सैन्य संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने की तैयारी में हैं और इस दिशा में दोनों देशों की सेनाएं एक और युद्ध अभ्यास करने जा रही हैं। ये युद्धाभ्यास उस समझौते के बाद पहला युद्धाभ्यास होगा जिसमें कि दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के एयरबेस और साजो-सामान का इस्तेमाल कर सकती हैं। ये युद्धाभ्यास उत्तराखंड में होगा और इसके लिए तारीख तय की गई है 14सितंबर से 27 सितंबर तक की। उत्तराखंड में रानीखेत के पास चौबटिया इलाके में भारत और अमेरिकी की सेनाएं साझा अभ्यास करेंगी।

भारत और अमेरिका के बीच सैन्य और रणनीतिक संबंध तेजी से प्रगाढ़ होते जा रहे हैं। पिछले महीने ही यानी अगस्त में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर के बीच वाशिंगटन में लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (LEMOA) पर दस्तखत किए गए थे। इस समझौते के तहत दोनों देशों की सेनाएं विशेष स्थितियों में मरम्मत और सप्लाई के लिए एक-दूसरे के बेस का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसके अलावा ईंधन लेने, संयुक्त अभ्यास, ट्रेनिंग, आपदा राहत और मानवीय मदद के मामले में भी एक-दूसरे की सुविधाओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। रानीखेत के चौबटिया में 14 सितंबर से शुरू होने वाला भारत-अमेरिका की सेनाओं की साझा अभ्यास इस समझौते के बाद पहला साझा सैन्य अभ्यास है।

भारत और अमेरिकी की सेनाएं इससे पहले भी कई साझा अभ्यास कर चुकी हैं। जून में भारत, अमेरिका और जापान की सेनाओं ने मालाबार अभ्यास में दक्षिण चीन सागर के पास संयुक्त सैन्य अभ्यास किया था। माना जा रहा है कि चीन को सख्त संदेश देने के लिए भारत और अमेरिका ने ये साझा अभ्यास किया था। दरअसल चीन दक्षिण चीन सागर पर अपने एकाधिकार का दावा करता है जबकि इसके आसपास के कई छोटे-छोटे देश भी यहां अपना अधिकार जताते हैं और सदियों से उनका यहां से वास्ता रहा है। बावजूद इसके चीन मानता नहीं है। पिछले दिनों उसे अंतर्राष्ट्रीय ट्रिब्युनल से भी दक्षिण चीन सागर के मसले पर मात खानी पड़ी थी जब ट्रिब्युनल ने उसके दावे को खारिज कर दिया था और अर्जी देने वाले फिलिपींस के दावे को सही बताया था।

ये संयुक्त सैन्य अभ्यास इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि चीन, भारत और अमेरिका के संबंधों को संदेह से देख रहा है और चीनी थिंक टैंक ने भारत-अमेरिका समझौते पर ऐतराज भी किया था। भारत और अमेरिका की एक-एक गतिविधि पर चीन नजर बनाए हुए है और साथ ही वो अपनी सैन्य क्षमता में भी इजाफा किए जा रहा है। हाल ही में चीन ने चीन ने अपने सभी ग्राउंड फोर्सेज को बेहद आधुनिक माने जाने वाले लड़ाकू हेलीकॉप्टरों WZ-10 से लैस कर दिया है। इन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल हवा से हवा में हमले करने और टैंकों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। चीन के इस तरह के कदम को भारत से जोड़ कर देखा जा रहा है और इसे भारत के खिलाफ उठाया गया चीन का बड़ा कदम बताया जा रहा है।

चीन के इस कदम के बाद अब चीन की सभी ग्रुप आर्मी के पास कम से कम एक एवियेशन ब्रिगेड है। चीन की ये तैयारियां भारत के लिए चिंता का विषय हैं क्योंकि ने कभी इस तरह की कोशिशें नहीं की हैं, या फिर वो उन बातों पर कायम नहीं रह सका है कि जिससे कि उस पर भरोसा किया जा सके। चीन की तरफ से ट्रायल से गुजर रहे अपने स्टील्थ फाइटर विमानों जे20 को भारत और चीन की सीमा पर तैनात करने का फैसले की भी खबरें आई थीं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसी खबरें आई थीं कि चीन ने भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों के जवाब में जे20 को तैनात किया है और जे20 विमान को तिब्बत के देओचेंग एयरपोर्ट पर देखा गया था, हालांकि चीन ने ऐसी रिपोर्ट्स को गलत बताया था। चीन के जे20 स्टील्थ फाइटर विमानों की खासियत है कि ये रडार पर भी नजर नहीं आते,और अपना काम कर देते हैं।

भारत की तरफ से अपनी सीमाओं पर ताकत बढ़ाने से भी चीन तिलमिलाया हुआ है। भारत ने कई वर्षों के बाद लद्दाख में भारतीय क्षेत्र में करीब 100 टैंकों की तैनाती की है। लद्दाख के दुरुह क्षेत्र में टैंकों की तैनाती आसान काम नहीं है, क्योंकि माइनस तापमान में टैंक का ईंधन तक जम जाता है और उसे गर्म रखने के लिए उन्हें हरदम ऑन रखने जैसे कदम उठाए जाते हैं। भारतीय जवान भी यहां पर देश की रक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा कर रखवाली करते हैं। चीन की तैयारी और ताकत बढ़ाने की कवायद ब्रह्मोस को रोकने के लिए है या नहीं, इस पर बहस जारी है लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि ब्रह्मोस की तैनाती से चीन तिलमिलाया हुआ है।

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