बलोचिस्तान के बाद मुस्लिम आतंकियों से लड़ रहे कुर्दिस्तान ने भी मांगी भारत से मदद

1

बलू‍च‍िस्तान और पीओके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले की प्राचीर से दिए गए बयान ने वहां पर आजादी के लिए संघर्ष कर रहे लोगों के दिलो में उम्मीद की किरण जगा दी है। ऐसी ही एक अवाज तुर्की और इराक के मध्य बसे कुर्दिस्तान से भी आई है कि भारत को कुर्दों के संघर्ष में मदद के लिए आगे आना चाहिए।

तकनीकी रूप से फिलहाल कुर्दिस्तान का बड़ा भाग इराक का हिस्सा है, लेकिन हकीकत ये है कि कुर्दों ने ISIS से अपने दम पर जबरदस्त संघर्ष छेड़ रखा है। भारत एशिया महाद्वीप में संघर्ष करते लोगों के लिए बड़े भाई की भूमिका अख्तियार कर चुका है। महिला लड़ाकू ब्रिगेड की बहादुरी के लिए जानें जाने वाले कुर्दिस्तान ने भारत से मदद की गुहार लगाई है।
कुर्दिस्तान की खासियत है पेशमर्गा, उसके जांबाज लड़ाके और उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने वाली उसकी महिला फाइटर्स। इन महिला फाइटर्स से ISIS के लड़ाके भी से डरते हैं क्योंकि उनकी मान्यता है कि अगर वे महिलाओं के हाथों मारे जाएंगे तो उन्हें नर्क जाना पड़ेगा।

इराक के स्वशासित कुर्द क्षेत्र ने भारत से मांग की है कि भारत ISIS से उसकी लड़ाई में उसे मदद दे। कुर्दों का कहना है कि ISIS के डर से सीरिया से भागकर कुर्दिस्तान में शरण ले चुके 18 लाख लोगों को दवा और भोजन दे पाना अकेले उसके लिए संभव नहीं है।

अब भारत को तय करना है कि कुर्दों द्वारा मदद की इस गुहार को पर वो क्या फैसला लेती है, क्योंकि इराक भारत का मित्र देश है और कुर्दो का एक बड़ा भाग इराक का हिस्सा है। लेकिन दूसरी हकीकत ये है कि भारत ने अभी हाल ही में कुर्दिस्तान की राजधानी ERBIL में अपना वाणिज्य दूतावास खोला है और ISIS के चंगुल में फंसे 39 भारतीयों को छुड़ाने में उसे कुर्दों के मदद की जरूरत है। इससे पहले मोसूल में फंसी भारतीय नर्सों को ISIS के चंगुल से छुड़ाने में भी पिछले साल कुर्दों ने भारत की मदद की थी।

जानकार कहते हैं कि जब से ISIS ने भारत से लड़ाके बुलाने शुरू किए हैं, तब से भारत की पश्चिम एशिया नीति में बदलाव दिखाई पड़ रहा है। ERBIL में दूतावास का खोला जाना उसी बदलाव का नतीजा है। तेल की अकूत भंडार वाले कुर्दिस्तान में कट्टर धार्मिक मान्यताओं की जगह नहीं है, वो आने वाले समय में एक आजाद मुल्क बन सकता है और भारत के लिए पश्चिम एशिया में एक साथी भी।

सूत्रों का कहना है कि इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए भारत कुर्दों के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को बढ़ाएगा। उसे हर कदम पर नैतिक समर्थन भी देगा, लेकिन फिलहाल कुर्दों को फौजी मदद देने से भारत परहेज करेगा।

Loading...

1 COMMENT

  1. Humko apane desh per Garv hona chahiye gaddaro Ki koi kom nahi hoti Bharat ek din mahasatta banega yeah hai modi sarkar ka kamal

Leave a Reply