औरंगजेब ने अपनी बेटी को 20 साल जेल में रखा, वो कृष्ण और छत्रसाल की दीवानी हो गयी थी

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हमारे फिल्मी भांड जिन्हें हम फिल्मबाज कहते है इन लोगों का बस एक ही काम रह गया है इतिहास से झूठे किस्से निकालना जिस से हिन्दुओ को निशाना बनाया जा सके,ये घिनोने फिल्मबाज सच्चे इतिहास पर भी फिल्म नहीं बना सकते क्योंकि इनको अपने ‘चार्ली हेब्दो” होने का भय रहता है, गले न कटने लग जाये

इन फिल्मबाजो ने बाजीराव जैसे योद्धा को प्रेमी बना कर रख दिया, और अब तो हद ही हो गयी इन्होंने रानी पद्मिनी को नारी के सम्मान और स्वाभिमान की निशानी है उनको कलंकित करने का काम किया

औरंगजेब की सबसे बड़ी बेटी थी जेब उन निसा वो बेहद खूबसूरत भी थी और पहली औलाद होने के कारण बताया जाता है कि औरंगजेब उसे बेहद प्रेम भी करता था

जेब उन निसा ने एक लाइब्रेरी बनाया उसे पढ़ने का शौख था उसने अपनी लाइब्रेरी में हर तरह की किताबें रखी जिसमे उसने सनातन धर्म से जुडी किताबे भी रखी, उसने सनातन धर्म की किताबें पढ़ी और वो कृष्ण भक्त हो गयी अपने चाचा दारा शिकोह की जैसी ही वो सनातन धर्म की ओर झुक गयी

साथ ही साथ जेब उन निसा को बुंदेलखंड के कुंवर छत्रसाल से प्रेम हो गया, वो छत्रसाल को पत्र भी लिखने लगी
जैसे ही औरंगजेब को ये बाते पता चली उसने फ़ौरन बेटी को दिल्ली से दूर लाहौर भेज दिया वहां जेब उन निसा 7 सालों तक रही, पर वो कृष्ण और छत्रसाल के प्रेम में डूबी रही, जिसके कारण औरंगजेब बहुत विचलित हुआ, उसने वहां के गवर्नर के बेटे अकील खान को कहा कि वो जेब उन निसा को प्रेम में पटाये और उस से निकाह करे, पर छत्रसाल की प्रेम में डूबी जेब उन निसा ने इंकार कर दिया

औरंगजेब वही था जिसने अपने बाप को भी 7 साल तक कैद में रखा और शाहजहां वही मर गया उसी तरह औरंगजेब ने गुस्से में जेब उन निसा को भी दिल्ली के शाहजहानाबाद में 20 साल तक कैद में रखा और वो 20 साल जेल में रहने के बाद वही जेल में ही मर गयी

वो जेल में रहकर भक्ति गीत गाती रही और प्राण त्याग दिए ये असल इतिहास किसी फिल्मी रोमांटिक कहानी से कम नहीं है पर हमारे फिल्मबाज इसपर कोई फिल्म नहीं बना सकते और हां इतिहासकार भी इतने टुच्चे है कि वो आपको ये सब बताते भी नहीं है।

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