पीट पीट कर 35 बांग्लादेशी मुस्लिमो ने डॉ नारंग मार डाला, सोया रहा माननीय सुप्रीम कोर्ट

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सबसे पहले तो हम आपको साफ़ कर दें की भारत का संविधान और कानून और अदालते सब अंग्रेजों द्वारा ही बनाये गए, आज भी संविधान कानून और अदालतें अंग्रेजी प्रणाली पर ही चल रहे है आंबेडकर और नेहरू इन सबने कोई संविधान नहीं बनाया इन्होने तो ब्रिटेन, आयरलैंड और ऐसे ही देशों के क़ानूनी और संविधान में से कॉपी पेस्ट कर भारत का संविधान तैयार कर दिया जिसमे भारतीय कुछ भी नहीं था आज भी अधिकतर कानून वही चल रहे है जो अंग्रेजों ने 1860 में बनाये थे

चलिए अब असल मुद्दे पर आते है, सुप्रीम कोर्ट एक ऐसा कोर्ट है जो स्वयं भी कोई मामला अपने संज्ञान में ले सकता है, उसकी सुनवाई कर सकता है मामला क्या है ? मामला है बहुत से लोगों द्वारा 1 शख्स की पिटाई, और उसके बाद मौत

2 उदाहरण है, पहला अलवर का जहाँ अवैध तरीके से गाय ले जाने वाले मुस्लिम को गौरक्षकों ने पीटा उसकी मौत हो गयी, इसपर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से फौरन पूछा “क्यों न गौरक्षकों पर बैन लगाया जाये”

अब इसी प्रकार का दुसरा उदाहरण लीजिये  दिल्ली के रोहिणी में डॉ पंकज नारंग को 35 अवैध बांग्लादेशियों ने पीटा जिस से डॉ नारंग की मौत हो गयी  पर इस मामले पर आजतक सुप्रीम कोर्ट ने 1 भी टिपण्णी नहीं की, जबकि ये घटना सुप्रीम कोर्ट से मजह  10 किलोमीटर की दुरी पर हुआ

सुप्रीम कोर्ट ने आजतक नहीं पूछा की क्यों न अवैध बांग्लादेशियों को बाहर किया जाये ये सुप्रीम कोर्ट हर चीज धर्म के आधार पर ही तो कर रहा है, मुस्लिम मरा तो सुप्रीम कोर्ट एक्टिव हुआ, हिन्दू मरा तो 1 टिपण्णी भी नहीं, ये कानून क्या सबके लिए बराबर है ?

वैसे सुप्रीम कोर्ट ये क्यों नहीं पूछ रही की, जब राजस्थान जैसे राज्य में गौहत्या अपराध है, भारत के अधिकतर राज्यों में ये अपराध ही है, ऐसे में मुस्लिम बार बार अपराध कर ही क्यों रहे है  जिस से ये हिंसक वारदाते हो, भाईचारा क्यों नहीं चाहते कट्टरपंथी

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