3 साल से भी कम समय में देश के सारे दुश्मन हुए परेशान, अरे ये ही तो है अच्छे दिन

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2014 में भारत के प्रधानमंत्री की गद्दी पर भारत की जनता ने बिठाया नरेंद्र मोदी को 70 सालों की गरीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, सेकुलरिज्म, बेकारी, अलगाववाद, नक्सलवाद से लड़ने के लिए जनता ने चुना नरेंद्र मोदी को
क्या किसी ने ये कल्पना की थी की, “कांग्रेसी और वामपंथी जो घोर विरोधी थे वो एक होंगे (बंगाल में दोनों ने गठबंधन किया)” क्या कल्पना करी की, “वामपंथी और ममाता एक होंगे (नोटबंदी पर एक हुए)
भ्रष्टाचार की बात करने वाला केजरीवाल लालू का हाथ थमेगा, सपा के साथ मंच पर नोटबंदी का विरोध करेगा, कांग्रेस के समर्थन से सरकार चलाएगा लालू और नितीश एक होंगे, क्या ये किसी ने कल्पना की थी 3 साल से भी कम समय और सारे देश के दुश्मन एक हो गए , सबके सब एक हो गए आज दिल्ली के जंतर मंतर पर सभी एक होकर कर रहे नोटबंदी का विरोध सब एक क्यों हुए, क्योंकि सभी को है मोदी का डर क्या अलगाववादी हो, नक्सलवादी हो, यहाँ तक की कांग्रेस के नेता मोदी को हटाने के लिए पाकिस्तान से मदद मांगने लगे (मणिशंकर अय्यर ने मांगी थी मदद)
अरे भैया 3 साल से कम समय में ममाता की तड़प, केजरीवाल की खुजली, लालू मुलायम की घबराहट, सोनिया और कांग्रेस की उदासी  देश के दुश्मन वामपंथियों-अलगाववादियों का बिलबिलाना, जिहादियों पत्थरबाजों की शामत
सबकुछ 3 साल से भी कम समय में देख लिया
देश के दुश्मन सिर्फ 3 साल में हो गए परेशान भैया सही में ये ही तो है अच्छे दिन, ये शख्स यानि नरेंद्र मोदी 2024 तक रह गया तो भारत विश्वगुरु जरूर बनेगा

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