20 रुपए का दूध गरीब के काम आएगा, भैया 337 करोड़ तो गरीब के और अधिक काम आएगा

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सेकुलरिज्म ने क्या हाल कर दिया देश का, ये फिल्मबाज़ आखिर कितने दोगले होते है ? अधिक पुरानी बात नहीं है आपको अच्छे से याद होगा की एक अजेंडे वाली फिल्म में एक फिल्मबाज़ हिन्दुओ को फिजूलखर्ची और अंधविश्वासी बता रहा था

फिल्मबाज़ हिन्दुओ को बता रहा था की “1 लोटा दूध शिवलिंग पर चढाने से अच्छा है उसे किसी गरीब को दे दो उसका पेट भरेगा” ठीक है हिन्दू सेक्युलर है, और सेकुलरिज्म में वो फिल्मबाज़ की बात मान लेता है, चलो जी कोई बात नहीं

अभी पिछले दिनों फिल्मबाज़ों के अड्डे यानि मुंबई में एक विदेशी नाचने वाला आया था और बड़े पैमाने पर यही फिल्मबाज़ 76-76 हज़ार की टिकट लेकर गए थे, फिल्मबाज़ों ने भीड़ लगा ली थी वो नाचने वाला 90 मिनट यानि डेढ़ घंटे में 337 करोड़ और 50 लाख रुपए भारत से लेकर कनाडा भाग जाता है

पर 1 भी यकीन मानिये 1 भी फिल्मबाज़ नहीं कहता की ये तो फिजूल खर्ची है, 337 करोड़ एक पहले से ही आमिर शख्स को देने से तो कहीं अच्छा है की 337 करोड़ शहीद सैनिको के परिजनों या आत्महत्या तक को मजबूर किसानो की मदद के लिए दे दो उनके कितने काम आएगा

यकीन मानिये 337 करोड़ में तो लाखों किसानों की मदद हो जायेगा  हर किसान के परिवार में 4 भी लोग हो तो अंदाजा लगाइये की कितने लोगों का भला होगा  हमारे शहीद सैनिको के परिजनों को कुछ लाख भी मुश्किल से नसीब होते है, और ये मॉडर्न लोग पहले से ही एक अमीर शख्स को 90 मिनट के 337 करोड़ दे रहे है असल में ये शर्मनाक है, पर हमारे किसी फिल्मबाज़ को शर्म नहीं की वो 1 शब्द भी बोले

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